नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर के मांडला गांव में प्रस्तावित थी 180 बीघा भूमि पर औद्योगिक परियोजना, एप्रो ओवरसीज की निदेशक ने 17 लोगों पर लगाए गंभीर आरोप; डीएम से न्याय की गुहार।
मुजफ्फरनगर। पांच हजार लोगों को रोजगार देने का दावा करने वाली औद्योगिक परियोजना करोड़ों रुपये के भुगतान के बावजूद जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने के आरोपों में उलझ गई है। मांडला गांव में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क को लेकर रुड़की की एप्रो ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक अभिलाषा सिंह ने 7 करोड़ 84 लाख 50 हजार रुपये दिए जाने के बाद भी भूमि हस्तांतरित नहीं किए जाने का आरोप लगाया है। मामले में उन्होंने जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। वहीं, इस प्रकरण में उत्तराखंड के मंगलौर थाने में 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। मंगलवार को उत्तराखंड के रुड़की निवासी अभिलाषा सिंह ने मीडिया सेंटर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि कंपनी ग्राम मांडला, तहसील सदर क्षेत्र में बरला-बसेड़ा मुख्य मार्ग के निकट करीब 180 बीघा भूमि पर औद्योगिक पार्क स्थापित करना चाहती थी। परियोजना के जरिए लगभग पांच हजार कुशल और अकुशल श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना थी। इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई थी। अभिलाषा सिंह के मुताबिक, रुड़की निवासी जितेंद्र वर्मा ने कंपनी प्रबंधन से संपर्क कर मांडला गांव में लगभग 130 बीघा जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था। आरोप है कि भूमि को विवाद और अन्य भार से मुक्त बताया गया। तीन जुलाई 2024 को जमीन खरीदने का अनुबंध हुआ और प्रति बीघा 10.25 लाख रुपये कीमत तय की गई। इसी दिन तीन लाख रुपये टोकन राशि के रूप में दिए गए। उन्होंने बताया कि 27 अगस्त 2024 को नए खसरा नंबरों की जमीन के लिए दूसरा अनुबंध किया गया। इसके बाद जितेंद्र वर्मा के खाते में आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिए 20 लाख रुपये और भेजे गए। इस तरह शुरुआती भुगतान 23 लाख रुपये तक पहुंच गया। कंपनी की निदेशक का आरोप है कि जितेंद्र वर्मा ने मुशीर आलम निवासी खुड्डा, थाना छपार को भी जमीन खरीद की प्रक्रिया में सहयोगी बताया। इसके बाद विभिन्न भूमिधारकों और उनके परिवार के सदस्यों के खातों में कुल 5 करोड़ 42 लाख रुपये स्थानांतरित किए गए। इसके अतिरिक्त, जितेंद्र वर्मा, मुशीर आलम और उनके परिजनों व संबंधियों के खातों में भी 2 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपये भेजे जाने का दावा किया गया। कंपनी के अनुसार, जमीन खरीद और भराव कराने के नाम पर किए गए इन भुगतानों की कुल राशि 7 करोड़ 84 लाख 50 हजार रुपये है। आरोप है कि इतनी बड़ी रकम दिए जाने के बावजूद कंपनी के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई और विक्रय पत्र निष्पादित करने से भी इनकार कर दिया गया। अभिलाषा सिंह का कहना है कि कंपनी ने कथित धोखाधड़ी के संबंध में उत्तर प्रदेश पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इसके बाद 20 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के मंगलौर थाने में 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।बकंपनी की निदेशक ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि संबंधित लोगों से कंपनी के पक्ष में भूमि की रजिस्ट्री कराने अथवा पूरी धनराशि वापस दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि भूमि विवाद के कारण औद्योगिक पार्क की योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के कथित भुगतान और पांच हजार लोगों को रोजगार देने की प्रस्तावित योजना के मामले में जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है।
