नीरज प्रजापति
कानपुर में 411 करोड़ रुपये से अधिक की 48 विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के दौरान सपा प्रमुख पर बरसे मुख्यमंत्री; परिवारवाद, कानून-व्यवस्था और अयोध्या के विकास को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना।
कानपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए राजनीतिक विरासत और नेतृत्व क्षमता का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि सत्ता विरासत में मिल सकती है, लेकिन बुद्धि और विवेक हासिल करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। उनके इस बयान ने प्रदेश की सियासत में राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। मुख्यमंत्री सोमवार को कानपुर के बिठूर में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 411 करोड़ रुपये से अधिक की 48 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। विकास कार्यों के साथ अपने संबोधन में उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की राजनीति पर तीखे सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि राजनीतिक पद विरासत में मिलने से कोई व्यक्ति अपने आप कुशल नेतृत्वकर्ता नहीं बन जाता। उन्होंने प्रतीकात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि एक बार विरासत के सहारे सत्ता मिल सकती है, लेकिन उसी तरीके से बार-बार सत्ता हासिल करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। योगी ने दावा किया कि प्रदेश की जनता सपा के पिछले कार्यकाल को देखते हुए उसे सत्ता से बाहर कर चुकी है। अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने सपा और कांग्रेस पर प्रदेश को पुराने दौर की अव्यवस्था की ओर ले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने सपा के पूर्ववर्ती शासनकाल का उल्लेख करते हुए कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और परिवारवादी राजनीति को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। हालांकि, ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर विपक्ष का पक्ष अलग हो सकता है। मुख्यमंत्री ने अयोध्या के विकास का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस के शासनकाल में धार्मिक विरासत तथा बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी हुई। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या में विकास परियोजनाओं को लेकर विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। योगी ने कहा कि मौजूदा सरकार ने धार्मिक स्थलों के विकास और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता दी है। मुख्यमंत्री के इस हमले को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश में राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है। दूसरी ओर, अखिलेश यादव ने भी सत्ता को लेकर अपनी राजनीतिक सोच सामने रखते हुए कहा है कि उन्हें जनता की सेवा के लिए कुर्सी चाहिए, सिंहासन नहीं। इससे दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक शब्दयुद्ध और तेज होने के संकेत मिलते हैं।
