नीरज प्रजापति

भूटान सीमा से आए फेरो सिलिकॉन के 215 ट्रक जांच के घेरे में, आवास पर नहीं मिले कारोबारी राजीव जैन; कानूनी नोटिस जारी होने से व्यापारिक जगत में हलचल।

मुजफ्फरनगर। भूटान सीमा के रास्ते भारत में आयात किए गए फेरो सिलिकॉन की जांच ने मुजफ्फरनगर तक हलचल मचा दी है। करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की कथित टैक्स चोरी के मामले में पश्चिम बंगाल के कस्टम विभाग की टीम ने शहर में दस्तक देकर कारोबारी राजीव जैन के आवास पर दबिश दी। जांच का दायरा सितंबर और अक्टूबर में भारत पहुंचे फेरो सिलिकॉन से लदे 215 ट्रकों तक फैला बताया जा रहा है। कारोबारी के घर पर नहीं मिलने के बाद टीम ने उन्हें कानूनी नोटिस जारी किया। इस कार्रवाई ने आयात कारोबार से जुड़े दस्तावेजों और कथित कर अनियमितताओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जांच की अहम कड़ी 25 अक्टूबर को भारत-भूटान सीमा पर फेरो सिलिकॉन से लदे दो ट्रकों को पकड़े जाने से जुड़ी बताई जा रही है। कस्टम विभाग ने कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद दोनों ट्रकों को सीज कर दिया था। इसके बाद अधिकारियों ने संबंधित आयात के रिकॉर्ड, दस्तावेजों और ट्रकों की आवाजाही से जुड़े विवरणों की पड़ताल शुरू की। जांच में सितंबर और अक्टूबर के दौरान आए 215 ट्रकों के आयात का मामला सामने आने की बात कही जा रही है। विभागीय जांच में करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की कथित टैक्स चोरी का अनुमान जताया गया है। हालांकि, इस राशि और कथित कर चोरी की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। इसी जांच के सिलसिले में बुधवार दोपहर करीब दो बजे कोलकाता से आई कस्टम विभाग की टीम मुजफ्फरनगर पहुंची। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के लिए टीम ने शहर कोतवाली और खालापार थाना पुलिस को साथ लिया। इसके बाद भारत माता मंदिर के निकट पार्श्वनाथ कॉलोनी स्थित कारोबारी राजीव जैन के आवास पर दबिश दी गई। बताया गया है कि फेरो सिलिकॉन का आयात ‘श्री वैंकटेश्वर इंटरप्राइजेज’ नामक फर्म के जरिए किया गया था। टीम जब कारोबारी के आवास पर पहुंची तो वह वहां नहीं मिले। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें कानूनी नोटिस जारी कर दिया। नोटिस के जरिए आगे की जांच में उनकी भूमिका और संबंधित रिकॉर्ड के संबंध में जानकारी जुटाने की कार्रवाई की जा रही है। कस्टम विभाग की जांच में 8 सितंबर, 16 सितंबर, 19 सितंबर, 7 अक्टूबर और 25 अक्टूबर की तारीखों का भी उल्लेख बताया गया है। इन तारीखों से जुड़े आयात और दस्तावेजों की जांच के जरिए अधिकारी पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटे हैं। अब जांच का अहम पहलू यह है कि संबंधित ट्रकों के आयात संबंधी रिकॉर्ड में क्या विवरण दर्ज हैं और कथित कर अ नियमितताओं की जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है। फेरो सिलिकॉन का इस्तेमाल लोहे और स्टील के गुणों को बेहतर बनाने के लिए औद्योगिक इकाइयों में किया जाता है। ऐसे में इस कच्चे माल के आयात से जुड़ा मामला औद्योगिक व्यापार और सीमा शुल्क व्यवस्था, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल कस्टम विभाग की इस कार्रवाई के बाद कारोबारी जगत में चर्चा तेज है। हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर कारोबारी राजीव जैन की भूमिका या कथित टैक्स चोरी में उनकी संलिप्तता को अंतिम रूप से स्थापित नहीं माना जा सकता। कारोबारी का पक्ष भी सामने नहीं आया है। फिलहाल कस्टम विभाग आयात के रिकॉर्ड और संबंधित तथ्यों की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने, संबंधित पक्षों के जवाब सामने आने और आधिकारिक निष्कर्ष जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित 40 करोड़ रुपये के कर मामले में वास्तविक स्थिति क्या है।

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