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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकार किसी कर्मचारी से उच्च पद का कार्य लेकर उसे उस पद के वित्तीय लाभों से वंचित नहीं रख सकती। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन प्रिंसिपलों ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के रूप में काम किया है, उन्हें उस अवधि के लिए डीईओ के वेतन और भत्ते दिए जाएं। यह फैसला जस्टिस नमित कुमार की सिंगल बेंच द्वारा सुनाया गया।

कोर्ट ने कहा कि जब यह निर्विवाद है कि याचिकाकर्ताओं ने उच्च पद की जिम्मेदारियां निभाई हैं, तो राज्य की कानूनी जिम्मेदारी है कि उन्हें उस पद से जुड़े सभी वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि “बराबर काम के लिए बराबर वेतन” का सिद्धांत इस मामले में पूरी तरह लागू होता है। इस मामले में पंजाब शिक्षा विभाग में कार्यरत सरबजीत सिंह समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत का रुख किया था। उनका कहना था कि उन्हें विभिन्न आदेशों के जरिए डीईओ का कार्यभार सौंपा गया, लेकिन उन्हें उस पद के वेतन और भत्ते नहीं दिए गए।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि बाद में कुछ को पदोन्नति मिल गई, जबकि कुछ सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं, लेकिन जिस अवधि में उन्होंने उच्च पद पर काम किया, उसका भुगतान अब तक नहीं किया गया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 3 महीने के भीतर सभी याचिकाकर्ताओं के बकाया वेतन और अन्य लाभों की गणना कर उनका भुगतान किया जाए।

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