सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में डॉग लवर्स और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने अपने पुराने आदेश में किसी भी तरह का बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले के साथ ही कई याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं, जिनमें सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाने वाले निर्देश को वापस लेने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने कहा कि देश में आवारा कुत्तों से जुड़े हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और यह अब सार्वजनिक सुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुका है। अदालत के अनुसार, बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सार्वजनिक जगहों से हटाने का आदेश कायम
सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए निर्देश को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखा जाए। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि इन कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस उन्हीं जगहों पर नहीं छोड़ा जाएगा।

नागरिक सुरक्षा पर जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को सुरक्षित जीवन और स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को ऐसे खतरों से बचाएं।

अदालत ने कई मामलों का उल्लेख किया जिनमें बच्चों पर हमले, बुजुर्गों को घायल करने की घटनाएं और विदेशी पर्यटकों पर हमले शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात में सिर्फ नियमों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।

पिछले आदेश में कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक रहे, और इसके लिए अलग निर्धारित स्थान बनाए जाएं। इस फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन्हें अब खारिज कर दिया गया है।

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