मुजफ्फरनगर पुलिस ने कांवड़ यात्रा को लेकर एक फरमान जारी किया था। इसमें कहा है कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर ढाबे वाले और खाने-पीने की चीजें वाले ठेले वालों को अपना नाम लिखना होगा। इसे लेकर पूरे देश में खूब विवाद हुआ, प्रदेश से लेकर केंद्र तक में खलबली मच गई थी। कई होटल और ढाबा मालिकों को अपना नाम बदलना पड़ा था। योगी सरकार ने इस फैसले को पूरे प्रदेश के लिए लागू कर दिया था लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इसपर अंतरिम रोक ही लगा दिया है।

कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करते हुए कहा कि दुकानदारों को अपनी पहचान बताने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर शुक्रवार को जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने इन मामलों में अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल किया है। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। होटल चलाने वालों को भोजन के प्रकार यानी वह शाकाहारी है या मांसाहारी की जानकारी देनी होगी। उन्हें अपना नाम लिखने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।

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