नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत रद्द किए जाने और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने के बाद, आसाराम ने गुरुवार शाम को जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचकर सरेंडर कर दिया है।
कोर्ट ने कहा- आस्था और भरोसे का हुआ कत्ल:
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आसाराम की अपील खारिज कर दी। न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को पीड़िता भगवान मानती थी, उसी ने उसकी आस्था और भरोसे को तोड़ा। अदालत ने माना कि इस कृत्य से पीड़िता की स्वतंत्रता, गरिमा और मासूमियत को गंभीर चोट पहुंची है।
एयरपोर्ट पर समर्थकों का हुजूम:
आसाराम के जोधपुर पहुंचने की खबर मिलते ही एयरपोर्ट के बाहर उसके समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई। वह कार में बैठकर समर्थकों का अभिवादन करते हुए पाल स्थित अपने आश्रम पहुंचा। वहां कुछ समय बिताने के बाद, वह मेडिकल जांच के लिए एम्स (AIIMS) गया और प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम को जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।
क्या है पूरा मामला:
गौरतलब है कि आसाराम को 2018 में जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था। पीड़िता 2013 में आश्रम पहुंची थी, जहां उसके साथ यह घिनौनी वारदात हुई थी। हालांकि, हालिया फैसले में हाईकोर्ट ने आसाराम को सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया है, लेकिन दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा को यथावत रखा गया है। अब आसाराम के वकील इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं।
