राष्ट्रीय राजधानी के कर्तव्य पथ पर निकली गणतंत्र दिवस परेड में उत्तर प्रदेश की झांकी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उत्तर प्रदेश की झांकी इस बार ‘महाकुंभ’ पर केंद्रित थी। नई दिल्ली में आयोजित पुरस्कार समारोह में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उत्तर प्रदेश की झांकी को प्रथम स्थान प्राप्त करने पर ट्रॉफी तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

इस साल का सबसे महत्वपूर्ण आयोजन ‘महाकुंभ’ अध्यात्म, धरोहर, विकास और डिजिटल प्रगति का संगम है। उत्तर प्रदेश की झांकी में ‘समुद्र मंथन’, ‘अमृत कलश’ और संगम तट पर डुबकी लगाते साधु-संतों के प्रदर्शन के साथ प्रयागराज में जारी महाकुंभ का जश्न मनाया गया। उत्तर प्रदेश की झांकी में ‘विकास’ और ‘विरासत’ का अद्धभुत ‘संगम’ भी प्रदर्शित किया गया।

संगम में डुबकी लगाते श्रद्धालुओं को दर्शाया गया
झांकी के अगले हिस्से में आगे की ओर झुके हुए ‘अमृत कलश’ की प्रतिकृति प्रदर्शित की गई, जो पवित्र ‘अमृतधारा’ के प्रवाह का प्रतीक थी। उसके इर्द-गिर्द शंख बजाते, संगम में पवित्र स्नान करते और ध्यान लगाते साधु-संतों के अलावा गंगा, यमुना, सरस्वती के पवित्र संगम में डुबकी लगाते श्रद्धालुओं को दर्शाया गया।

झांकी में समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों को दर्शाया गया
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की ओर से झांकी के बारे में पहले साझा किए गए विवरण के मुताबिक, झांकी के पैनल पर भित्ति चित्रों और स्क्रीन के माध्यम से ‘अखाड़ों’ और ‘अमृत स्नान’ के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को दर्शाया गया है। विवरण के अनुसार, इसके मध्य में ‘समुद्र मंथन’ की पौराणिक कथा का सजीव चित्रण किया गया है, जो महाकुंभ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक है। झांकी के पिछले हिस्से में समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों को दर्शाया गया।

 

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