जालोर जिले के भीनमाल स्थित महाकेश्वर धाम इन दिनों आस्था, तप और साधना का जीवंत केंद्र बना हुआ है। कड़ाके की ठंड और शून्य के करीब तापमान के बीच महाकेश्वर धाम के महंत राधागिरी जी महाराज कठोर तपस्या में लीन हैं। अपने गुरु 1008 नवीनगिरी महाराज के सानिध्य में की जा रही यह साधना श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

महंत राधागिरी जी महाराज प्रतिदिन अलसुबह ठीक 5 बजे 108 मटकों के ठंडे जल से जलधारा तपस्या कर रहे हैं। भीषण सर्दी में इस तरह की साधना न केवल उनकी असाधारण सहनशक्ति को दर्शाती है, बल्कि आध्यात्मिक दृढ़ता और संकल्प का भी प्रतीक है। तपस्या के दौरान पूरा धाम “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठता है।

इस अनोखी साधना को देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु महाकेश्वर धाम पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि महाराज की तपस्या जनकल्याण, विश्व शांति और मानव कल्याण की भावना से प्रेरित है। लोगों का विश्वास है कि इस तपस्या से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है।

धाम परिसर में इन दिनों भक्ति और तपस्या का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ऐसी कठोर साधना विरले संत ही कर पाते हैं। महंत राधागिरी जी महाराज की यह तप साधना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मसंयम, त्याग और साधना का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

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