मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए Operation Sindoor को लेकर एक साल बाद सामने आई विस्तृत अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट ने युद्ध की असली तस्वीर सामने रखी है। शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह धारणा बनाई गई थी कि पाकिस्तान ने भारतीय लड़ाकू विमानों को गिराकर बढ़त हासिल कर ली है। यह वही पैटर्न था जो अक्सर भारत-पाक संघर्षों में देखा जाता है—जहां पाकिस्तान तेजी से सूचना युद्ध में बढ़त लेने की कोशिश करता है, जबकि भारत अपेक्षाकृत संयमित रहता है। लेकिन स्विट्जरलैंड की संस्था Centre d’Histoire et de Prospective Militaires द्वारा 15 जनवरी 2026 को जारी रिपोर्ट ने इन शुरुआती दावों को अधूरा और भ्रामक बताया। रिपोर्ट में 7 से 10 मई तक चले 88 घंटे के इस हवाई अभियान का क्रमवार विश्लेषण किया गया है।
भारत को शुरुआती झटका
7 मई को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद पाकिस्तान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। इस शुरुआती टकराव में भारत को नुकसान हुआ। रिपोर्ट के अनुसार एक राफेल, एक मिराज-2000 और एक अन्य लड़ाकू विमान (मिग-29 या सुखोई-30) खोया गया। यही घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छा गईं और पाकिस्तान की बढ़त का नैरेटिव बना।
8-9 मई को रणनीतिक पलटवार
लेकिन इसके बाद भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए पाकिस्तान के एयर डिफेंस नेटवर्क को निशाना बनाना शुरू किया। 8 मई को भारत ने पाकिस्तान के आठ एयर डिफेंस ठिकानों पर हमला किया, जिनमें प्रमुख रडार सिस्टम शामिल थे। 9 मई को भी ऐसे चार और हमले किए गए। इन हमलों में लोइटरिंग म्यूनिशन (जैसे इजरायली हारोप और हार्पी) का इस्तेमाल किया गया, जो दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाते हैं। इन लगातार हमलों से पाकिस्तान की निगरानी, समन्वय और जवाब देने की क्षमता कमजोर हो गई। आधुनिक युद्ध में यह बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि बिना प्रभावी रडार और कमांड सिस्टम के हवाई युद्ध लड़ना मुश्किल हो जाता है।
भारत के एयर डिफेंस सिस्टम में बड़ा बदलाव
इसी दौरान भारत ने लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के विमानों की गतिविधियों को सीमित कर दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 300 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली प्रणाली ने पाकिस्तान के विमानों को पीछे हटने पर मजबूर किया। इससे पाकिस्तान के लिए अपने हवाई अभियान को जारी रखना कठिन हो गया। पाकिस्तान ने जवाब में सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल दागे, लेकिन भारत के मजबूत और एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें काफी हद तक विफल कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, आधे से ज्यादा ड्रोन सिर्फ एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से ही गिरा दिए गए, जबकि बाकी को इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से निष्क्रिय किया गया।
10 मई को निर्णायक हमला
10 मई की सुबह भारत ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के अंदर गहराई तक सटीक हमले किए। इन हमलों में ब्रह्मोस, स्कैल्प और अन्य लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह रही कि ये हमले भारतीय सीमा के भीतर से ही किए गए। इन हमलों में इस्लामाबाद के पास नूर खान एयरबेस, मुरीद एयरबेस (ड्रोन सेंटर), रहीम यार खान, रफीकी और सुक्कुर जैसे कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद दूसरी लहर में सरगोधा, जैकबाबाद और भोलारी एयरबेस पर भी हमले हुए। रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमान, ड्रोन सिस्टम, रडार और कमांड सेंटर क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए। सैटेलाइट तस्वीरों ने भी इन ठिकानों पर हुए नुकसान की पुष्टि की।
अंतत: क्यों झुका पाकिस्तान?
10 मई तक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी थी। पाकिस्तान की वायुसेना अपनी क्षमता खो रही थी और उसके लिए अभियान जारी रखना मुश्किल हो गया था। इसी कारण उसने युद्धविराम की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला किसी कूटनीतिक दबाव से ज्यादा युद्ध के हालात के कारण लिया गया। यह आपरेशन बताता है कि युद्ध की असली तस्वीर शुरुआती घटनाओं से नहीं, बल्कि पूरे अभियान के परिणाम से तय होती है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने शुरुआती नुकसान के बावजूद रणनीतिक बढ़त हासिल कर अंततः अपना उद्देश्य पूरा किया।
