प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन ने स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया की मौजूदगी में रवींद्रनाथ टैगोर और भारत-स्वीडन के बीच के गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक रिश्तों की याद में खास तोहफों का आदान-प्रदान किया. रवींद्रनाथ टैगोर की साझा सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देते हुए विशेष उपहार दिए गए.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन, स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया की मौजूदगी में, रवींद्रनाथ टैगोर और भारत-स्वीडन के बीच के गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक रिश्तों की याद में खास तोहफ़ों का आदान-प्रदान किया.” स्वीडन के प्रधानमंत्री की ओर से दिए गए उपहार में एक बॉक्स था, जिसमें टैगोर की लिखी हुई दो छोटी ‘सूक्ति की प्रतियां’ थीं. इसके साथ एक छोटा सा विवरण और 1921 में स्वीडन के उप्साला विश्वविद्यालय की यात्रा के दौरान ली गई टैगोर की एक तस्वीर भी शामिल थी. ये मूल दस्तावेज हाल ही में स्वीडन के राष्ट्रीय अभिलेखागार में मिले हैं, जो टैगोर ने 1921 और 1926 में स्वीडन यात्रा के दौरान लिखे थे.
तोहफे पाकर क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने बांग्ला में स्वीडन के गिफ्ट का जिक्र करते हुए एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा “गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की हाथ से लिखी गई दो सूक्तियों की प्रतियां पाकर मैं अत्यंत भावुक हूं. इस विचारशील उपहार के लिए स्वीडन सरकार और वहां की जनता का मैं तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं. यह हमारे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतिबिंब है.
গুরুদেব রবীন্দ্রনাথ ঠাকুরের হাতে লেখা দুটি এপিগ্রামের ফ্যাক্সিমিলি পেয়ে অত্যন্ত অভিভুত। সুইডেনের সরকার ও জনগণকে ধন্যবাদ এই সুচিন্তিত উপহারের জন্যে। এটি আমাদের দুই দেশের দীর্ঘকালীন সাংস্কৃতিক বন্ধনের প্রতিচ্ছবি।
গুরুদেব ঠাকুরের কথা প্রজন্মের পর প্রজন্ম এবং ভৌগোলিক সীমানা… https://t.co/5NsLPCRuRP
— Narendra Modi (@narendramodi) May 18, 2026
पीएम मोदी के उपहार मे झलकी भारत की सांस्कृतिक
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री को टैगोर की रचनाओं का एक संग्रह भेंट किया, साथ ही शांतिनिकेतन से एक खास हस्तनिर्मित बैग भी दिया. इस बैग में ऐसे डिज़ाइन हैं जिन्हें खुद टैगोर ने स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए चुना था. यह बैग इस बात का प्रतीक है कि कला सिर्फ संग्रहालयों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बननी चाहिए. हालांकि गुरुदेव टैगोर 1913 में नोबेल पुरस्कार लेने स्वीडन नहीं जा सके थे, लेकिन 1921 में जब वे स्वीडन गए थे, तब राजा गुस्ताव पंचम ने उनका स्वागत किया था. ये उपहार भारत और स्वीडन के बीच गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक रिश्तों को दर्शाते हैं और टैगोर की स्थायी विरासत को सम्मान देते हैं. यह आदान-प्रदान उनके 1926 के ऐतिहासिक स्वीडन दौरे की 100वीं वर्षगांठ के अवसर से भी जुड़ा है.
