बिहार के पंडित दीनदयाल उपाध्याय-गया रेलखंड के सासाराम रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह उस वक्त भारी अफरा-तफरी मच गई जब प्लेटफॉर्म पर खड़ी एक पैसेंजर ट्रेन अचानक आग का गोला बन गई। सासाराम से आरा होकर पटना जाने वाली गाड़ी संख्या 53212 डाउन पैसेंजर ट्रेन में लगी इस भीषण आग से पूरे स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया और यात्री जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हादसे के बाद रेलवे प्रशासन की सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि रेलवे प्रबंधन मुस्तैद होता तो ट्रेन को इतनी बुरी तरह जलने से बचाया जा सकता था।

 

यात्रियों का दावा है कि इमरजेंसी में जब रेलवे के अग्निशमन सिलेंडरों (Fire Extinguishers) का इस्तेमाल करने की कोशिश की गई तो वे खाली निकले उनमें गैस ही नहीं थी। इतना ही नहीं, प्लेटफॉर्म पर ट्रेनों में पानी रिफिलिंग के लिए बिछाई गई पाइपलाइन भी पूरी तरह सूखी थी जिसमें पानी की एक बूंद तक नहीं थी। इस भारी कुप्रबंधन के कारण शुरुआती कीमती मिनटों में आग पर काबू नहीं पाया जा सका और देखते ही देखते ट्रेन की बोगी धधक उठी।

एक बोगी पूरी तरह जलकर खाक

दमकल विभाग और रेलकर्मियों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया गया। इस हादसे में पैसेंजर ट्रेन की एक बोगी पूरी तरह जलकर राख हो गई। नुकसान को आगे बढ़ने से रोकने के लिए जलती हुई बोगी को तुरंत ट्रेन के बाकी हिस्से से काटकर अलग किया गया। आरपीएफ (RPF) निरीक्षक संजीव कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह ‘शॉर्ट सर्किट’ मानी जा रही है हालांकि जांच के बाद ही असल कारण साफ हो पाएगा। इस हादसे ने रेलवे की आपातकालीन व्यवस्थाओं की कलई खोलकर रख दी है जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों में गहरा गुस्सा है। लोगों का कहना है कि अगर यह आग ट्रेन के चलने के बाद बीच रास्ते में लगी होती तो सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।

 

 

रेलवे की सफाई: कोई यात्री नहीं था सवार

हादसे पर सफाई देते हुए पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सरस्वती चन्द्र ने बताया कि घटना सोमवार सुबह करीब 05:30 बजे की है जब ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 06 पर खड़ी थी। उन्होंने कहा, जिस समय कोच से धुआं निकलने की बात सामने आई, उस वक्त बोगी पूरी तरह खाली थी और उसमें कोई यात्री सवार नहीं था। सूचना मिलते ही सुबह 06:00 बजे प्रभावित बोगी को अलग कर दिया गया और 06:05 बजे फायर ब्रिगेड की मदद से स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया। इस घटना में किसी भी यात्री या रेलकर्मी को आंच नहीं आई है।

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