पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच एक गंभीर सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। मालदा जिले में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया में जुटे सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने लगभग नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा। इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई और प्रभावित अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों (Central Forces) की तत्काल तैनाती का निर्देश दिया है।

इस घटना पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का निर्देश दिया। बंगाल को “सबसे ज़्यादा ध्रुवीकृत राज्य” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को पहले से सोची-समझी साज़िश और SIR प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश करार दिया।

 

बुधवार को कालियाचक II ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) के बाहर SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने सबसे पहले न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की। हालाँकि, उनकी यह मांग ठुकरा दी गई। शाम करीब 4 बजे, उन्होंने BDO ऑफिस का घेराव कर लिया और तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया।

 

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को 9 घंटे तक भीड़ द्वारा बंधक बनाए रखने की घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए इस कृत्य को “सुनियोजित और अधिकारियों का मनोबल तोड़ने वाला” करार दिया। कोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों (Central Armed Forces) की तैनाती का आदेश दिया है।

 

 

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल को देश का “सबसे अधिक ध्रुवीकृत” राज्य बताया। कोर्ट ने कहा कि महिला जजों सहित अधिकारियों को घेरना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक “हिसाब-किताब वाली और किसी खास मकसद से की गई” हरकत थी।

 

CJI सूर्यकांत एडवोकेट जनरल को संबोधित करते हुए “दुर्भाग्य से, आपके राज्य में हर कोई राजनीतिक नजरिए से बात करता है। क्या आपको लगता है कि हमें नहीं पता कि उपद्रवी कौन हैं? मैं खुद रात 2 बजे तक स्थिति की निगरानी कर रहा था।”

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