यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसे एक पत्नी ने दायर किया था। महिला का आरोप था कि उसके वैवाहिक जीवन के टूटने के पीछे उसके पति की प्रेमिका की सक्रिय और दुर्भावनापूर्ण भूमिका रही।

याचिका में कहा गया कि पति-पत्नी के बीच के प्यार और साथ का अधिकार महिला को मिला हुआ था, लेकिन पति की प्रेमिका के हस्तक्षेप से यह अधिकार उससे छीन लिया गया। 

पत्नी ने क्षतिपूर्ति की मांग रखते हुए प्रेमिका को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। HC ने कहा कि यह केवल पति-पत्नी के बीच का निजी विवाद नहीं है। इसमें एक तीसरे पक्ष की भी भूमिका दिखती है। 

अदालत ने सुनवाई के दौरान Alienation of Affection की अवधारणा का जिक्र किया, जो कई विदेशी देशों में लागू है। 

इस अवधारणा के तहत कोई भी जीवनसाथी उस व्यक्ति पर मुकदमा कर सकता है, जिसने जानबूझकर उसके वैवाहिक रिश्ते में हस्तक्षेप किया और पति-पत्नी के बीच दरार पैदा कर दी।

अदालत ने साफ किया कि अंतिम फैसला सुनवाई पूरी होने के बाद ही दिया जाएगा और तभी यह तय होगा कि पत्नी को मुआवजा मिलेगा या नहीं। लेकिन इस आदेश ने वैवाहिक विवादों में एक नई कानूनी राह खोल दी है। 

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