गुरदासपुर के गांव बोहजा के रहने वाले युवक गुरसेवक सिंह की रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मौत हो गई। करीब 8 महीने बाद उनकी पार्थिव देह रूस के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटी हुई उनके पैतृक गांव पहुंची, जहां पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई। नम आंखों के साथ गांव के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर भेजा गया शव 
जानकारी के अनुसार गुरसेवक सिंह कुछ साल पहले रोजी-रोटी कमाने के लिए जर्मनी गया था। बाद में वह रूस पहुंच गया और वहां की सेना में भर्ती हो गया। परिवार के मुताबिक 13 सितंबर 2025 से उनका संपर्क टूट गया था और तभी से वह लापता थे। परिजनों ने बताया कि 7 मई 2026 को उन्हें सूचना मिली कि गुरसेवक सिंह की Russia-Ukraine War के दौरान मौत हो गई है। इसके बाद उनकी पार्थिव देह दिल्ली एयरपोर्ट से गांव बोहजा लाई गई। रूस की सेना ने उनके शव को सैनिक वर्दी और रूस के राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर पूरे सम्मान के साथ भेजा।

पंजाब सरकार से मदद की गुहार 
अंतिम संस्कार के दौरान गुरसेवक सिंह के छोटे भाई गुरबाज सिंह ने चिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर गांव के लोग और परिजन भावुक नजर आए।
मृतक के रिश्तेदार और ब्लॉक समिति सदस्य मुख्तार सिंह बोहजा ने बताया कि गुरसेवक सिंह का परिवार बेहद गरीब है। उनके पिता सुखविंदर सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार, पंजाब सरकार और प्रशासन से परिवार को आर्थिक सहायता और हर संभव मदद देने की मांग की है।

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