मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद में नई सरकार के कार्यकाल को करीब सात माह का समय पूर्ण हो रहा है। ऐसे में अभी भी पालिका की तत्कालीन पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल की मुश्किल कम नहीं हो रही है। अब फिर से शासन ने उनके खिलाफ की गई शिकायतों के मामले में नए सिरे से जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। नगर मजिस्ट्रेट को एक सप्ताह में आख्या उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

अंजू अग्रवाल के खिलाफ सभासद राजीव शर्मा और मनोज वर्मा ने उनके कार्यकाल के दौरान कथित रूप से वित्तीय अनियमितता और पालिका को आर्थिक क्षति पहुंचाए जाने के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी, जिस पर जिला प्रशासन और शासन स्तर से जांच व कार्रवाई की गई। जुलाई 2022 को उनके वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए थे, इसके बाद उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी और कोर्ट से अधिकार बहाल तो करा लिए, लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से उनको अधिकार वापस करने में वह लापरवाही बरतने के आरोप लगाती रहीं। इसी बीच उनके द्वारा शासन को जांच से संबंधित मामलों में आरोपों को लेकर अपना स्पष्टीकरण भी भेजा जाता रहा।

यूपी में नगरीय निकाय संपन्न होकर निकायों में नई सरकार का गठन भी हो गया, लेकिन उनके खिलाफ जांच का दायरा लगातार बना हुआ है। अब फिर से शासन ने जिला प्रशासन से तत्कालीन पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर स्पष्ट जांच आख्या मांगी है। उप सचिव नगर विकास ने जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा कि नगरपालिका परिषद की तत्कालीन पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल पर उनके कार्यकाल में पालिका को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। इसको लेकर जांच हुई है और इसमें आरोपों के आधार पर अंजू अग्रवाल द्वारा 03 जुलाई 2023 को अपना स्पष्टीकरण भी शासन को भिजवाया है। जिसमें उनके द्वारा आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। इस प्रकरण में उप सचिव नगर विकास विभाग ने जिलाधिकारी से तत्कालीन पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल द्वारा भेजे गए ताजा स्पष्टीकरण पर परीक्षणोपरांत आख्या मांगी है।

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