इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावी यातायात प्रबंधन के लिये शहर के प्रमुख विद्यालयों के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जाए। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने वर्ष 2020 में गोमती नदी के किनारे रहने वाले लोगों द्वारा दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

हाईकोर्ट ने ये आदेश किए जारी 
पीठ ने पिछली सुनवाइयों के दौरान विद्यालयों के खुलने और बंद होने के समय जाम की समस्या से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किये थे। राज्य सरकार ने पिछले आदेशों का पालन करते हुए 18 विद्यालयों में तैनात मार्शलों के काम-काज पर एक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि जहां कुछ विद्यालयों में मार्शलों ने बेहतर तरीके से यातायात प्रबंधन किया, वहीं कई अन्य विद्यालयों में उनका काम-काज संतोषजनक नहीं पाया गया।

‘स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम’ के जरिए नजर रखी जा रही 
सुनवाई के दौरान मौजूद रहीं पुलिस उपायुक्त (यातायात) रवीना त्यागी ने अदालत को बताया कि शहर के मुख्य चौराहों और सड़कों पर ‘स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम’ के जरिए नजर रखी जा रही है। उन्होंने अदालत को बताया कि विद्यालयों के आसपास भी सीसीटीवी कैमरों द्वारा निगरानी की ऐसी ही व्यवस्था लागू करने से यातायात नियमों को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिल सकती है। अदालत ने राज्य के अपर महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह इस प्रस्ताव पर सभी संबंधित विभागों और विद्यालयों के प्रबंधन के साथ विस्तार से चर्चा करें। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।

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