पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पैदा हुए दबाव के बीच पाकिस्तान ने अमेरिका में अपनी लॉबिंग गतिविधियां तेज कर दी हैं। अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान ने 1 मई 2026 को अमेरिका की सरकारी संबंध और नीति सलाहकार कंपनी Ervin Graves Strategy Group LLC के साथ एक नया समझौता किया है। इस समझौते के तहत पाकिस्तान अगले 24 महीनों तक हर महीने 50,000 डॉलर का भुगतान करेगा। इस प्रकार पूरे अनुबंध की कुल कीमत लगभग 12 लाख डॉलर (करीब 10 करोड़ रुपए) है। इसके अलावा शुरुआत में तीन महीने की सेवाओं के लिए 1.5 लाख डॉलर अग्रिम भी दिए गए हैं।
समझौते के अनुसार यह फर्म अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों, उनके सहयोगियों और विदेश नीति, रक्षा, व्यापार तथा बजट से जुड़े संसदीय समितियों के साथ संपर्क स्थापित करेगी। पाकिस्तान चाहता है कि उसे अमेरिका में आतंकवाद-रोधी सहयोगी और क्षेत्रीय स्थिरता के साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया जाए। हालांकि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि Harish Parvathaneni ने कहा था कि पाकिस्तान आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता और भारत विरोधी गतिविधियों को लगातार संरक्षण देता रहा है।
FARA रिकॉर्ड के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी सांसदों, रक्षा विशेषज्ञों, ट्रेजरी अधिकारियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और पत्रकारों के साथ दर्जनों बैठकें और संपर्क स्थापित किए थे। मई 2025 में केवल कुछ दिनों के भीतर लगभग 60 संपर्क दर्ज किए गए थे। विश्लेषकों का मानना है कि भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में आतंकी ढांचे पर कार्रवाई के बाद इस्लामाबाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि बचाने और अमेरिकी समर्थन बनाए रखने के लिए लॉबिंग तेज की है।
नए समझौते के तहत लॉबिंग फर्म को Congressional Pakistan Caucus को मजबूत करने के साथ-साथ अमेरिकी कांग्रेस के प्रभावशाली समूहों के साथ भी संपर्क बढ़ाने का जिम्मा दिया गया है। समझौते में अमेरिकी विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, ट्रेजरी विभाग, ऊर्जा विभाग और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने की भी योजना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच पाकिस्तान अमेरिका में अपने रणनीतिक महत्व को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
