भारत में तंबाकू का सेवन न सिर्फ फेफड़ों को काला कर रहा है बल्कि करोड़ों परिवारों की जेब भी खाली कर रहा है। ‘ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) ग्लोबल हेल्थ’ में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन के अनुसार यदि भारतीय परिवार तंबाकू (बीड़ी, सिगरेट, गुटखा) पर खर्च करना बंद कर दें तो देश के लगभग 2.05 करोड़ परिवार गरीबी के चक्र से बाहर निकलकर एक बेहतर आर्थिक श्रेणी तक पहुंच सकते हैं।

तंबाकू पर लगाएं लगाम, तभी गरीबी होगी दूर 

विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू नियंत्रण को अब केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं बल्कि ‘गरीबी उन्मूलन’ की रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए। तंबाकू छोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 1.70 करोड़ और शहरों के 35 लाख परिवारों के जीवन में तुरंत सुधार हो सकता है।

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सबसे गरीब परिवारों में से 12.4% परिवार अपनी उस आय को भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों पर खर्च कर सकेंगे जो अभी धुएं में उड़ रही है। मध्यम आय वाले लगभग 71 लाख परिवारों को भी तंबाकू छोड़ने से सीधा आर्थिक लाभ होगा।

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वहीं टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS) और ICMR के विशेषज्ञों ने वर्ष 2022-23 के आंकड़ों का विश्लेषण कर पाया कि गरीब और ग्रामीण परिवार अपनी कुल मासिक आय का 6.4% से 6.6% हिस्सा तंबाकू पर खर्च कर देते हैं। जैसे-जैसे आय बढ़ती है तंबाकू पर होने वाले खर्च का प्रतिशत कम होता जाता है। यानी तंबाकू का सबसे ज्यादा आर्थिक प्रहार समाज के सबसे निचले तबके पर होता है।

दुनिया के 80% तंबाकू उपयोगकर्ता कम और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। तंबाकू न केवल इलाज के खर्च को बढ़ाता है बल्कि समय से पूर्व होने वाली मौतों के कारण अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचाता है।

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