जम्मू में बुधवार को कश्मीरी पंडित समुदाय का बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। राहत आयुक्त (Relief Commissioner) कार्यालय के बाहर सैंकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और राशन कार्ड नियमों में किए गए बदलावों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को राहत आयुक्त कार्यालय की ओर बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प भी हुई। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

प्रदर्शन कर रहे कश्मीरी पंडितों का आरोप है कि नए नियमों और NFSA प्रक्रिया के कारण हजारों विस्थापित परिवारों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। समुदाय के लोगों का कहना है कि राशन कार्ड सत्यापन और नई श्रेणी व्यवस्था के चलते कई परिवारों का “माइग्रेंट स्टेटस” कमजोर पड़ सकता है, जिससे राहत और अन्य सुविधाओं पर असर पड़ेगा।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि मौजूदा प्रक्रिया को तुरंत वापस लिया जाए और विस्थापित कश्मीरी पंडितों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

क्या है NFSA और विवाद?

NFSA यानी National Food Security Act 2013 केंद्र सरकार की खाद्य सुरक्षा योजना है, जिसके तहत पात्र परिवारों को सस्ती दरों पर राशन उपलब्ध कराया जाता है। जम्मू-कश्मीर में हाल ही में राशन कार्डों और लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

कश्मीरी पंडित संगठनों का कहना है कि विस्थापित समुदाय को सामान्य श्रेणी में डालने की कोशिश की जा रही है, जबकि वे पिछले कई दशकों से अलग “माइग्रेंट” श्रेणी के तहत राहत सुविधाएं प्राप्त करते रहे हैं।

समुदाय का डर है कि यदि यह व्यवस्था बदली गई तो न केवल राशन लाभ बल्कि राहत, नकद सहायता और अन्य सरकारी सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है।

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