फैटी लिवर आज के समय में तेजी से बढ़ती हुई एक आम बीमारी बन गई है। जिसके लक्षण समय रहते पहचान लिए जाए तो इसे काबू किया जा सकता है। बता दें कि यह स्थिति तब होती है जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। ऐसा तब होता है जब गलत खानपान, ज्यादा तला-भुना खाना, मोटापा, physical activity की कमी और शराब का सेवन इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। बिना शराब के होने वाले फैटी लिवर को नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फैटी लिवर के शुरुआती संकेत शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे सकते हैं, जिनमें पैर भी शामिल हैं। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य थकान या दिनभर की गतिविधियों का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है।
पैरों में सूजन (Pedal Edema):
फैटी लिवर में पैरों में सूजन देखने को मिल सकती है। यह सूजन अक्सर दिन के अंत में ज्यादा महसूस होती है। लोग इसे लंबे समय तक खड़े रहने या थकान का असर मान लेते हैं, लेकिन यह लिवर की खराबी का संकेत भी हो सकता है।
लगातार थकान और कमजोरी:
फैटी लिवर में व्यक्ति को बिना ज्यादा काम किए भी थकान और कमजोरी महसूस होती है। शरीर में ऊर्जा की कमी बनी रहती है और काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
पेट के दाहिने हिस्से में दर्द:
इस स्थिति में पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है, क्योंकि वहीं लिवर स्थित होता है।
भूख कम लगना और पाचन समस्याएं:
फैटी लिवर के मरीजों में भूख कम लगना, मतली आना और पेट फूलने जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं।
critical situation में पीलिया:
यदि फैटी लिवर बढ़ जाता है तो त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ सकता है, जिसे पीलिया कहा जाता है। यह स्थिति लिवर की गंभीर समस्या का संकेत होती है।
डॉक्टर की सलाह जरूरी:
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। समय पर इलाज और सही जीवनशैली अपनाकर फैटी लिवर को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए तला-भुना खाना, ज्यादा मीठा, कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड से बचना चाहिए। नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण भी बेहद जरूरी है।
