अब नोरा वायरस …  यह एक कंटैगियस इन्फेक्शन है, जो अचानक उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा करता है. यह वायरस खासतौर पर भीड़भाड़ और बंद जगहों में तेजी से फैलता है, इसलिए स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल और क्रूज शिप जैसी जगहों पर इसके मामले अचानक बढ़ जाते हैं. हाल ही में इसका जो मामला आया है उसमें कैरेबियन प्रिंसेस क्रूज शिप पर नोरो वायरस फैलने के बाद 100 से ज्यादा यात्री और क्रू मेंबर बीमार पड़ गए. अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सीडीसी के मुताबिक जहाज पर मौजूद हजारों यात्रियों में से बड़ी संख्या में लोगों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी शिकायतें हुईं.

कितना खतरनाक है नोरा वायरस?

अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंश के मुताबिक, नोरो वायरस दुनिया में एक्यूट गैस्ट्रोएन्टेराइटिस यानी पेट और आंतों में इंफेक्शन की सबसे बड़ी वजहों में से एक है. हर साल करोड़ों लोग इसकी चपेट में आते हैं और उल्टी-दस्त के मामलों में इसकी बड़ी भूमिका मानी जाती है. ज्यादातर मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह इंफेक्शन गंभीर रूप ले सकता है.

कैसे आते हैं आप इस वायरस की चपेट में?

इस इंफेक्शन के लक्षण अचानक शुरू होते हैं. मरीज को तेज उल्टी, बार-बार दस्त, मतली और पेट में मरोड़ की शिकायत हो सकती है. कई लोगों में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और ठंड लगने जैसे लक्षण भी दिखते हैं. आमतौर पर मरीज एक से तीन दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि ठीक होने के बाद भी इंफेक्टेड व्यक्ति वायरस फैलाता रह सकता है. CDC के अनुसार नोरो वायरस के कई अलग-अलग प्रकार मौजूद हैं, इसलिए किसी व्यक्ति को जीवन में कई बार यह इंफेक्टेड हो सकता है. एक बार इंफेक्टेड होने के बाद भी शरीर को दूसरे प्रकार के वायरस से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती. यही वजह है कि दुनिया भर में इसके प्रकोप बार-बार देखने को मिलते हैं.

हर साल कितने लोग आते हैं इसकी चपेट में?

CDC का अनुमान है कि दुनियाभर में हर साल करीब 68.5 करोड़ मामले नोरो वायरस से जुड़े होते हैं. इनमें लगभग 20 करोड़ बच्चे पांच साल से कम उम्र के होते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक हर साल करीब 50 हजार बच्चों की मौत इस इंफेक्शन से जुड़ी दिक्कतों की वजह से होती है, खासकर उन देशों में जहां इलाज और हाइड्रेशन सुविधाएं सीमित हैं.

कितने देर में शरीर में दिखाई देने लगते हैं इसके लक्षण?

इंफेक्शन के 12 से 48 घंटे के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सबसे बड़ा खतरा डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी का होता है. लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर तेजी से पानी खो देता है. मुंह सूखना, चक्कर आना, कमजोरी और यूरिन कम होना इसके संकेत हो सकते हैं. बच्चों में रोते समय आंसू कम आना और अत्यधिक नींद आना भी इसके लक्षण माने जाते हैं.

कैसे कर सकते हैं इससे बचाव?

नोरो वायरस बहुत तेजी से फैलता है. इंफेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने, दूषित खाना खाने, गंदा पानी पीने या इंफेक्टेड सतह छूने से इंफेक्शन हो सकता है. क्रूज शिप, स्कूल, अस्पताल और नर्सिंग होम जैसी जगहों पर इसका खतरा ज्यादा रहता है. CDC के मुताबिक इंफेक्टेड व्यक्ति ठीक होने के दो हफ्ते बाद तक भी वायरस फैला सकता है.  फिलहाल नोरो वायरस का कोई खास इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. डॉक्टर मरीजों को ज्यादा तरल पदार्थ लेने, आराम करने और साफ-सफाई का ध्यान रखने की सलाह देते हैं. एंटीबायोटिक दवाएं इस संक्रमण पर असर नहीं करतीं, क्योंकि यह बैक्टीरिया नहीं बल्कि वायरस से होने वाली बीमारी है.

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