राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है. राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा 3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा को पेपर लीक के चलते रद्द कर दिया गया है. केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया है. इस निर्णय के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है. उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है, जहां छात्रों के बीच नाराजगी खुलकर सामने आ रही है.

NEET UG जैसी अहम परीक्षा का रद्द होना छात्रों के लिए किसी झटके से कम नहीं है. वर्षों की मेहनत, तैयारी और उम्मीदें अचानक अनिश्चितता में बदल गई हैं. उत्तराखंड के कई जिलों से छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है. परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए उन्होंने लंबी दूरी तय की थी, आर्थिक और मानसिक दबाव झेला था, लेकिन अब उन्हें फिर से उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा.

विपक्ष के आक्रामक तेवर

इस पूरे मामले पर उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि NEET UG परीक्षा रद्द करना युवाओं के सपनों के साथ सीधा मजाक है. उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सहित पूरे देश में लगातार हो रहे पेपर लीक यह दर्शाते हैं कि भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने में पूरी तरह विफल रही है.

यशपाल आर्य ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं सरकार की नीति और नीयत दोनों पर सवाल खड़े करती हैं. हर बार जांच के नाम पर औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं, बड़ी-बड़ी घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहता है. उन्होंने सरकार से आत्मनिरीक्षण करने की अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार खुद से पूछे कि क्या वह वास्तव में देश के युवाओं के साथ न्याय कर रही है.

23 लाख छात्रों पर असर 

इस फैसले का सबसे बड़ा असर देशभर के करीब 23 लाख छात्रों पर पड़ेगा, जिन्हें अब दोबारा परीक्षा देनी होगी. ये छात्र देश के 552 शहरों में स्थित सैकड़ों परीक्षा केंद्रों तक फिर से यात्रा करेंगे. इससे न केवल छात्रों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, बल्कि पर्यावरण पर भी असर पड़ेगा. लाखों लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत बढ़ेगी, जिससे प्रदूषण में भी इजाफा होगा.

छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं उनकी मेहनत और सिस्टम पर विश्वास दोनों को कमजोर कर रही हैं. वे मांग कर रहे हैं कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

फिलहाल, देशभर के छात्र दोबारा परीक्षा की तैयारी में जुटने को मजबूर हैं, लेकिन उनके मन में सिस्टम के प्रति अविश्वास और भविष्य को लेकर चिंता साफ दिखाई दे रही है.

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