अमेरिका-ईरान सीजफायर के बीच ईरान के फॉरेन मिनिस्टर अब्बास अरागची फिलहाल रूस जा पहुंचे हैं। उसके पहले वह पाकिस्तान और ओमान का भी दौरा कर चुके हैं। रूस जा

लेकर अमेरिका और ईरान में बातचीत का था लेकिन ये हुआ नहीं। इसके बाद पाकिस्तान में ईरान को शायद कुछ क्लियर समझ में नहीं आया कि यहां से हम एक प्रॉपर नेगोशिएशन पा सकते हैं या नहीं पा सकते हैं। तो इस वजह से इसके बाद रूस का जोर शोर से नाम चल रहा था कि मॉस्को हो सकता है कि इस बातचीत को मीडिएट करें। जिसके बाद सही में ये खबर आई कि वो वहां जाने वाले हैं और अब पहुंच भी गए है।  इस मुलाकात के दौरान सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामनेई के लिए विशेष संदेश भेजा और उनके अच्छे स्वास्थ्य और कुशलता की कामना भी की। यह सिर्फ एक शिष्टाचार नहीं बल्कि एक मजबूत कूटनीतिक संकेत है कि मॉस्को और तेहरान के बीच भरोसा और तालमेल लगातार गहराता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ऐसे संदेश अक्सर बड़े रणनीतिक रिश्तों की नींव को दर्शाते हैं। पुतिन ने इस बैठक में साफ तौर पर कहा कि मौजूदा मुश्किल हालात में ईरान के लोग मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में हालात बेहतर होंगे और क्षेत्र में शांति स्थापित होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। चाहे बात मिडिल ईस्ट की हो या वैश्विक शक्ति संतुलन की। रूस ने यह भी संकेत दिया कि वह केवल अपने हितों तक सीमित नहीं है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। अगर पिछले कुछ वर्षों पर नजर डालें तो रूस और ईरान के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। चाहे वो ऊर्जा सहयोग हो, सैन्य तालमेल हो या फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक दूसरे का समर्थन हो। दोनों देशों ने कई बार यह दिखाया कि वे एक दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं। खासकर अमेरिका जैसे मंचों पर भी दोनों देशों की सोच कई मुद्दों पर मिलती रही है जो उनके रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं। बैठक के दौरान पुतिन ने जिस तरह से ईरान के लोगों की मजबूती और धैर्य की बात की वो भी बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि कठिन हालात में भी ईरान के लोग मजबूती से खड़े रहेंगे और आने वाले समय में हालात बेहतर होंगे।

पाकिस्तान से और यकीनन इसका जो मकसद था वो यही था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच में कोई बैलेंस बन सके कोई शर्तें जो है समझौता किया जा सके और कोलैप्स ना हो जो भी बातचीत चल रही है ये सारी चीजें थी और उसके बाद जैसा आपने एक और जिक्र किया ओमान का तो रशिया जाने से पहले पाकिस्तान से ओमान पहुंचे वो यानी अब्बास आराची पहले इस्लामाबाद गए देन वो ओमान गए देन वो रशिया गए तो ओमान में हो सकता है बहुत मुमकिन है क्योंकि स्टेट ऑफ़ हॉर्मोस जो है वो सिर्फ ईरान के करीब नहीं है। दूसरी तरफ हां दूसरी तरफ ओमान भी है। तो ओमान और जब स्टेट ऑफ हॉर्मोस को लेकर ईरान ने घोषणा भी की थी कि हम यहां से टोल वसूलेंगे तो उसने वहां पे ओमान को भी इंक्लूड किया था कि हम यानी ईरान और ओमान मिलकर आपस में बांटेंगे इस टोल को दोनों मिलकर लेंगे। हालांकि ओमान ने इससे डिनाई किया था।

कर उन्होंने पाकिस्तान के साथ मीटिंग की है। यहां पर उनका जो मेन मकसद था वो था वहां के प्रेसिडेंट व्लादमीर पुतिन से मुलाकात का और वो मुलाकात हो चुकी है। सैयद अब्बास अराची ने जब रूस पहुंचे तो उन्होंने बताया कि इस्लामाबाद में यानी पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद वहां पर उनकी जो भी बातचीत हुई वो काफी प्रोडक्टिव रही और इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गुड कंसल्टेशंस यानी काफी अच्छा सलाह मशवरा उन्हें वहां से मिला। अमूमन डिप्लोमेटिक एरियाज में इस तरह की भाषा का उपयोग किया जाता है ताकि एक पॉजिटिव संदेश जाए। लेकिन अभी भी अनसर्टेनिटी बनी हुई है क्योंकि इस्लामाबाद टॉक्स का पहला राउंड फेल हो चुका है। सेकंड राउंड होने की बात चल रही थी। बीच में काफी जोर शोर से कयास लगने लगे थे जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टीम का अनाउंसमेंट किया था। ये भी खबर आ गई थी कि जेडी वेंस भी एक और दौर की बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाएंगे। स्टीव विटकॉफ जेड कुशनर के भी जाने की लगभग खबर तय थी। लेकिन फिर भी सेकंड राउंड की जो बातचीत है वो क्लियर नहीं हो पाई है।

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