सहारानपुर(मनीष अग्रवाल)। बेहट रोड बालाजी धाम के अचार्य शुभम कौशिक ने बताया आज बुधवार को चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें भोग, मंत्र, आरती और देवी का स्वरूप। आज चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। इस दिन देवी दुर्गा के सातवें रूप मां कालरात्रि की पूजा करने का विधान होता है। माता के विशाल केश चारों दिशाओं में फैले हुए हैं। मान्यता है की मां कालरात्रि की पूजा करने से बुरी शक्तियों और अकाल मृत्यु के भय से बचाव होता है। साथ ही, व्रती के जीवन में सुख-शांति आने लगती है। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन का खास महत्व बताया गया है। देवी का सातवां स्वरूप कालिका यानी काले रंग है। मां कालरात्रि को शुभंकरी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना करने से साधक को विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है। मां के इस स्वरूप से सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो सकती है। इसीलिए तंत्र-मंत्र के साधक मां कालरात्रि की विशेष रूप से पूजा करते हैं। अचार्य शुभम कौशिक ने कहा चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी व नवमी पर मां कालरात्रि की पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और देवी का स्वरूप चैत्र नवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात साफ वस्त्र धारण करें। फिर, पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें। एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें और उस पर लाल कंबल का आसन बिछाएं। माता कालरात्रि की प्रतिमा या मूर्ति आसन पर रखें। देवी के सामने घी का दीपक अवश्य जलाएं और उन्हें रोली,अक्षत, गुड़हल के फूल आदि जरूर अर्पित करें। अचार्य शुभम कौशिक जी ने बताया इस बार अष्टमी वीरवार सुबह से शुक्रवार दोपहर रहेगी उसके बाद नवमी शुरू हो जाएगी दोनों पर्व शुभ है,विधि विधान से मानये।
