नई दिल्ली, 15 मई । द्वारका कोर्ट ने उत्तम नगर में होली के दौरान हुई हत्या के मामले के आरोपितों को कोर्ट में फिजिकल रुप से पेश करने को लेकर दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय दे दिया है। एडिशनल सेशंस जज शिवाली बंसल ने 16 मई तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 मई को होगी।
दरअसल, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस ने पूछा था कि कानून-व्यवस्था और कैदियों की सुरक्षा का आकलन कर बताएं कि आरोपितों को कोर्ट में फिजिकल पेश किया जा सकता है कि नहीं। दिल्ली पुलिस को इस संबंध में शुक्रवार काे ही रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसके लिए समय देने की मांग की, जिसके बाद कोर्ट ने 16 मई तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया।
आज सुनवाई के दाैरान इस मामले के सभी 17 आरोपित वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अलग-अलग कोर्ट से पेश हुए। इसके पहले 11 मई को कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को मामले की चार्जशीट शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से पेश वकीलों ने आरोपितों को सुनवाई की अगली तिथि को फिजिकल कोर्ट में पेश करने की मांग की थी ताकि कोर्ट में चल रही कार्यवाही उनकी उपस्थिति में हो। इस पर कोर्ट ने संबंधित जेल प्रशासन को नोटिस देकर पूछा था कि वे कानून-व्यवस्था और कैदियों की सुरक्षा का आकलन कर ये बताएं कि आरोपितों को कोर्ट में फिजिकल पेश किया जा सकता है कि नहीं।
दिल्ली पुलिस ने 6 मई को दाखिल चार्जशीट में उमरद्दीन, कमरुद्दीन, जुम्माद्दीन, मुश्ताक, ताहिर, मुजफ्फर ऊर्फ मौजी, सलमा, शरीफन, सायरा बानो ऊर्फ काली, साहिल, समीर चौहान, शकील, मोहम्मद इस्माइल, इमामुद्दीन ऊर्फ लाला खान, अमीन, इमरान, रेहान और इमरान ऊर्फ बंटी को को आरोपित बनाया है। करीब 500 पन्नों की चार्जशीट में हत्या, गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा होना, दंगा करने, अनधिकृत रुप से प्रवेश करने और एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत आरोप लगाया गया है।
दरअसल, 4 मार्च को होली के दौरान तरुण भुटौलिया नामक 26 वर्षीय युवक की हत्या कर दी गई थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक तरुण भुटौलिया के परिवार की एक नाबालिग लड़की ने 4 मार्च को पानी भरे बैलून एक महिला पर फेंके थे। स्थिति तब बेकाबू हो गई जब महिला के रिश्तेदारों ने तरुण भुटौलिया पर डंडों से हमला किया जिससे वो घायल हो गया। जिसके बाद तरुण भुटौलिया की अगले दिन मौत हो गई। इस मामले में आरोपित मुस्लिम समुदाय का है जिसकी वजह से इसे सांप्रदायिक रंग दिया गया था। पुलिस के मुताबिक दोनों परिवारों के बीच पहले से कोई दुश्मनी नहीं थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में करीब 50 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इसके पहले दिल्ली नगर निगम ने इस मामले के एक आरोपित की संपत्ति का कथित रुप से अनाधिकृत हिस्से को ध्वस्त कर दिया था।
