up-picture-changing-with-skill

मीरजापुर, 18 अगस्त । 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस बीत चुका है। तिरंगा उतार दिया गया, देशभक्ति के गीतों की गूंज थम गई और आजादी की गाथा सुनाने वाले मंच भी शांत हो गए। लेकिन आजादी का अर्थ केवल एक दिन तिरंगे को सलाम करने तक सीमित नहीं है। इसका असली अर्थ तब सामने आता है, जब व्यक्ति सम्मान, श्रम और आत्मनिर्भरता की राह पकड़ता है। जेल की सलाखों के पीछे गूंजती हथकरघे की खटखट इसी ‘आजादी के बाद की आजादी’ की कहानी कहती है।

By editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights