नैनीताल, 17 अगस्त । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल द्वारा सोमवार को पीएलवी यानी पैरालीगल वालंटियर यानी पराविधिक स्वयं सेवकों और अधिकार मित्रों के लिए स्थायी लोक अदालत विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जन उपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों के त्वरित, सस्ते और सुलभ निस्तारण की प्रक्रिया तथा स्थायी लोक अदालत के अधिकार क्षेत्र की विस्तृत जानकारी दी गई।
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष-जिला न्यायाधीश प्रशांत जोशी के आदेश पर आयोजित कार्यक्रम में जिला प्राधिकरण की सचिव पारुल थपलियाल के निर्देशन में स्थायी लोक अदालत के सदस्यों ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण में बताया गया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22(बी) के अंतर्गत गठित स्थायी लोक अदालत के माध्यम से जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों का त्वरित समाधान किया जाता है।
यहां न्याय शुल्क नहीं लिया जाता और मामलों का निस्तारण कम समय में आपसी सुलह के आधार पर किया जाता है। एक करोड़ रुपये तक के विवाद मूल्य वाले ऐसे दीवानी एवं शमनीय आपराधिक मामले, जो किसी अन्य न्यायालय में लंबित नहीं हैं, स्थायी लोक अदालत में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। प्रशिक्षण में वायु, सड़क, रेल और जल परिवहन, डाक एवं दूरसंचार सेवाएं, विद्युत और जलापूर्ति, स्वच्छता, अस्पताल, बीमा, शैक्षणिक संस्थान, आवास एवं भू-संपदा, बैंकिंग तथा वित्तीय सेवाओं से जुड़े मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया समझाई गई।
साथ ही स्थायी लोक अदालत, लोक अदालत और उपभोक्ता मंच के बीच अंतर बताते हुए कहा गया कि सुलह विफल होने की स्थिति में स्थायी लोक अदालत गुण-दोष के आधार पर स्वयं निर्णय देने का अधिकार रखती है तथा उसके निर्णय के विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं है। प्रशिक्षण में पीएलवी और अधिकार मित्रों को आमजन तक इन व्यवस्थाओं की जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया गया।
