uk-ygyopavit-sanskar

हरिद्वार, 28 अगस्त । कनखल स्थित अद्वैत पीठ श्री सूरतगिरि बांग्ला गिरीशानंद आश्रम में शुक्रवार को श्रावणी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज के सानिध्य में वैदिक परंपरा अनुसार पूजा, यज्ञ और यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न हुए।

शुक्ल यजुर्वेद के ब्राह्मणों ने विधि-विधान से श्रावणी पर्व मनाया। आचार्य शिवपूजन के नेतृत्व में दर्जनों बटुकों को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञोपवीत धारण कराया गया। मंत्रों से आश्रम परिसर गूंज उठा।

इस अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति भी मौजूद रहे। उन्होंने वैदिक संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत और वैदिक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता बताई।

महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि ने कहा कि श्रावणी पर्व सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। यज्ञोपवीत केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन और कर्तव्यबोध की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को वेदों और संस्कृति से जोड़ना समय की जरूरत है। वेद और संस्कृत हमारी ज्ञान परंपरा के आधार हैं, इनके संरक्षण के लिए संत समाज और शिक्षण संस्थानों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने बटुकों को सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का आशीर्वाद दिया।

कार्यक्रम में कोठारी स्वामी उमानंद गिरि, संत-महात्मा, आचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

By editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights