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नई दिल्ली, 01 अक्टूबर । भारत को अन्य विकासशील देशों की तरह पूंजी प्रवाह आकर्षित करने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया संकट के बीच अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों को लेकर जारी अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े घटनाक्रमों में भारत के लिए अवसरों की कमी देश की निवेश लाने की क्षमता को प्रभावित कर रही है।

वित्त मंत्रालय की गुरुवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भारत के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करना एक कड़ी चुनौती बन गया है। इस अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है, हालांकि घरेलू स्तर पर जीडीपी वृद्धि मजबूत रही है।

मंत्रालय की सितंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा में यह कहा गया है कि इस साल जुलाई-अगस्त के जीएसटी संग्रह, निर्यात आंकड़े समेत उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक अप्रैल-जून, तिमाही में 7.8 फीसदी की मजबूत जीडीपी वृद्धि दर के बाद आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार में कुछ नरमी का संकेत देते हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक परिस्थितियां एक बार फिर प्रतिकूल हो गई हैं। सितंबर में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और भारतीय मुद्रा पर निकट अवधि में दबाव बना हुआ है।

वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वैश्विक और उससे उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितता का मतलब है कि भारत कोविड-19 के बाद की वृद्धि की उपलब्धियों पर निर्भर होकर नहीं रह सकता। इसे हर तिमाही में अर्जित करना होगा। नीति-निर्माताओं के सामने यही चुनौती है। इस रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘कारोबार के अनुकूल के बजाय अधिक प्रतिस्पर्धा के अनुकूल’ बनाने की जरूरत की बात कही गई है। इसमें कहा गया कि केवल प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था ही सफल, नवोन्मेषी और विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था बन सकती है।

अमेरिका के साथ ‘अस्थिर’ व्यापार संबंध, कृत्रिम मेधा के चलते वैश्विक स्तर पर पूंजी निवेश और सीमापार पूंजी प्रवाह में बदलाव तथा विकसित देशों की अपनी विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए निवेश हासिल करने की होड़ ने विकासशील देशों के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि शुद्ध आधार पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह इस वित्त वर्ष में पिछले साल की तुलना में बेहतर रह सकता है। इसमें कहा गया है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती देश के लिए एक बड़ी ताकत है।

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार समय के साथ निवेशक कोविड के बाद के वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती और लगातार ऊंची वृद्धि दर को महत्व देंगे। फिलहाल भारत में निवेशकों की दिलचस्पी कम नहीं है, लेकिन वे सतर्क हैं। मासिक समीक्षा में कहा गया है कि अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों की स्थिति, शुल्क संबंधी दबाव, कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता तथा वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े घटनाक्रमों में भारत से जुड़ी संभावनाओं का अभाव भारत की स्थिति को आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में प्रभावित कर रहा है।

रिपोर्ट ने आगाह किया गया है कि दिखने वाली आपसी मित्रता के बावजूद वैश्विक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति तेज हो रही है। ऊर्जा, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य और सेमीकंडक्टर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक आपूर्ति संबंधी झटके उभरने लगे हैं। जलवायु, वैश्विक स्थिति और मौद्रिक दबावों के एक साथ बढ़ने से भारत के आर्थिक परिदृश्य में मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ सकता है। आपूर्ति संबंधी झटकों से पैदा होने वाली महंगाई आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करेगी।

By editor

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