नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर में सघन निरीक्षण से दुकानदारों में बढ़ी सतर्कता, POS मशीन से बिक्री अनिवार्य, गोपनीय खरीद, स्टॉक रजिस्टर, CCTV और QR कोड की जांच से कसने की तैयारी।
मुजफ्फरनगर। शराब की दुकानों पर मनमानी कीमत वसूली, बिक्री के हिसाब-किताब और स्टॉक में संभावित गड़बड़ियों पर निगरानी मजबूत करने के लिए आबकारी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिले में चलाए गए सघन निरीक्षण अभियान के दौरान विभागीय टीमों ने दुकानों की बिक्री व्यवस्था से लेकर बोतलों पर दर्ज क्यूआर कोड तक की जांच की। संदेश साफ है कि मदिरा की बिक्री में पारदर्शिता, निर्धारित मूल्य और नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा। विभाग ने दुकानदारों को पीओएस मशीन के माध्यम से शत-प्रतिशत बिक्री करने के निर्देश देकर निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है।
बिक्री के आंकड़ों से लेकर स्टॉक तक, हर व्यवस्था की पड़ताल
आबकारी विभाग के निरीक्षण अभियान में केवल दुकानों की बाहरी व्यवस्था नहीं देखी गई, बल्कि बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का भी सत्यापन किया गया। टीमों ने स्टॉक रजिस्टर में दर्ज मदिरा की मात्रा का दुकानों में उपलब्ध शराब से मिलान किया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अभिलेखों और वास्तविक स्थिति के बीच किसी संभावित अंतर का पता लगाना तथा स्टॉक का सही हिसाब-किताब सुनिश्चित करना रहा। दुकान संचालकों को रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट रखने और विभागीय नियमों के अनुरूप काम करने के निर्देश दिए गए। स्टॉक की निगरानी को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया, ताकि बिक्री और उपलब्ध माल का विवरण व्यवस्थित रहे।
गोपनीय खरीद से परखी गई कीमतों की व्यवस्था
अभियान का एक अहम पहलू शराब की निर्धारित कीमत की जांच भी रहा। आबकारी विभाग की टीमों ने गोपनीय खरीद के जरिए यह परखने का प्रयास किया कि ग्राहकों से मदिरा की बिक्री के दौरान निर्धारित मूल्य ही लिया जा रहा है या नहीं। इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूलने जैसी संभावित अनियमितताओं पर अंकुश लगाना है। निर्धारित मूल्य से अधिक रकम वसूले जाने की शिकायतें उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। ऐसे में गोपनीय खरीद के माध्यम से निगरानी करना विभागीय कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी विशिष्ट दुकान पर ओवररेटिंग की पुष्टि अथवा किसी दुकानदार के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं है।
पीओएस मशीन के बिना बिक्री नहीं, पारदर्शिता पर जोर
निरीक्षण के दौरान दुकानदारों को निर्देशित किया गया कि मदिरा की पूरी बिक्री पीओएस मशीन के माध्यम से की जाए। इसका उद्देश्य प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना और बिक्री के आंकड़ों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। विभागीय निर्देशों के अनुसार, दुकान संचालकों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। बिक्री का सही रिकॉर्ड रहने से स्टॉक और बिक्री के विवरण का मिलान करना आसान होगा तथा निरीक्षण के दौरान अभिलेखों की जांच भी प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
CCTV कैमरों और QR कोड पर भी निगरानी
आबकारी टीमों ने दुकानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति जांचते हुए उन्हें चालू रखने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मदिरा की बोतलों पर अंकित क्यूआर कोड को विभागीय एप्लीकेशन के माध्यम से स्कैन कर संबंधित विवरण का सत्यापन किया गया। इस जांच का उद्देश्य दुकानों में उपलब्ध मदिरा से संबंधित जानकारी की पुष्टि करना और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना रहा। सीसीटीवी से लेकर क्यूआर कोड तक की जांच ने निरीक्षण को कई स्तरों पर केंद्रित रखा।
नियमों के पालन पर विभाग का सख्त संदेश
उत्तर प्रदेश शासन और आबकारी आयुक्त कार्यालय के निर्देशों के क्रम में चलाए गए इस अभियान के तहत जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विभागीय टीमों ने विभिन्न मदिरा दुकानों का निरीक्षण किया। अभियान के केंद्र में निर्धारित मूल्य पर बिक्री, पीओएस मशीन का अनिवार्य उपयोग, स्टॉक का भौतिक सत्यापन, सीसीटीवी संचालन और क्यूआर कोड की जांच रही। विभागीय निर्देशों का उद्देश्य शराब की बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और संभावित अनियमितताओं पर प्रभावी निगरानी रखना है।
