नई दिल्ली, 07 सितंबर । उच्चतम न्यायालय ने 2008 के जयपुर सीरियल बम धमाकों से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोहम्मद सरवर आजमी उर्फ ढिल्ला पप्पू को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह मामला काफी गंभीर है, इसलिए इसे किसी सामान्य जमानत मामले की तरह नहीं देखा जा सकता। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता की सुरक्षा को खतरा शामिल है।
सुनवाई के दौरान आजमी की ओर से कहा गया कि धमाकों से जुड़े अन्य आठ मामलों में उच्च न्यायालय पहले ही उसे बरी कर चुका है। सभी नौ बम एक ही साजिश का हिस्सा थे, इसलिए अगर उन आठ मामलों में उसे निर्दोष पाया गया है, तो इस मामले में भी उसे जेल में नहीं रखा जाना चाहिए। आजमी की ओर से कहा गया कि पुलिस ने इस मामले में उसे गिरफ्तार करने और आरोप दाखिल करने में 12 साल लगा दिए और इस मामले का मुख्य गवाह अविश्वसनीय है।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने आजमी की रिहाई का विरोध करते हुए कहा कि यह नौंवें बम का मामला दूसरे आठ मामलों से पूरी तरह अलग है। इसमें एक अलग जगह, एक अलग जिंदा बम और अलग सबूत हैं। इसके अलावा एक दुकानदार ने आजमी की पहचान की थी, जिसने उसे वह साइकिल बेची थी, जिसका इस्तेमाल बम ले जाने के लिए किया गया था।
