नई दिल्ली, 20 जुलाई । दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मानसून सीजन के लिए राजधानी की तैयारियों और शहरी बाढ़ से निपटने के उपायों की समीक्षा की। उपराज्यपाल की अध्यक्षता में सोमवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की बैठक हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, गृह मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव राजीव वर्मा और सभी संबंधित विभागों व एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
उपराज्यपाल ने जलभराव वाले चिह्नित हॉटस्पॉट पर क्षमता को तुरंत बढ़ाने और दिल्ली में राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों को पूरी तरह तालमेल के साथ काम करने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई भ्रम न रहे। उन्होंने मोबाइल हैवी-ड्यूटी पंपों को हर समय चालू रखने, लोगों की प्रतिक्रिया और जमीनी हालात की रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करने और मानसून के पीक सीजन से पहले दिल्ली की आपदा तैयारियों को और मजबूत करने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ करीबी तालमेल बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में मानसून की तैयारियों, जलभराव हॉटस्पॉट्स पर चल रहे कार्यों तथा सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय की विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के निरंतर प्रयासों से दिल्ली में जलभराव हॉटस्पॉट्स की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। हमारी टीमें 24×7 पूरी तत्परता के साथ मैदान में कार्य कर रही हैं ताकि इस मानसून दिल्ली की रफ्तार न थमे और नागरिकों का आवागमन सुगम बना रहे।
बैठक में तूफान व भारी बारिश के दौरान अक्सर गिरने वाले खतरनाक पेड़ों को पहले से हटाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इस बात पर जोर दिया गया कि दुखद हादसों के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय इस दिशा में पहले से ही कदम उठाए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस पर गंभीर चिंता जताई और निर्देश दिया कि जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए ऐसे पेड़ों की पहचान करके उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए।
उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि संकट के समय कई संगठनों के होने या अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच अधिकार क्षेत्र के बंटवारे के कारण बाढ़ या दुर्घटना से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे जगह किसी भी एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में आती हो, समस्या का समाधान तेजी से और आपसी तालमेल के साथ किया जाना चाहिए।
बैठक के आखिर में उपराज्यपाल ने सभी विभागों को अपनी मौजूदा क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करने और जमीनी स्तर पर काम पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि जलभराव की शिकायतों की पहचान करने और उन पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए लोगों की प्रतिक्रिया और जमीनी हालात पर सक्रिय रूप से नजर रखी जाए।
उपराज्यपाल ने कहा कि मानसून के समय पानी जमा होने वाले चिह्नित स्थानों की संख्या लगातार कम हुई है – 2024 में 194 से घटकर 2025 में 169 और 2026 में अब तक 34 हो गई है। यह सभी संबंधित एजेंसियों की लगातार प्लानिंग, तालमेल के साथ काम करने और निरंतर निगरानी के असर को दिखाता है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास भारत 2047 के विजन के अनुरूप एक सुरक्षित, ज्यादा मज़बूत और विश्व-स्तरीय दिल्ली बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
