प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता सेनानियों बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर बुधवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी और भारत की आजादी में उनकी भूमिका को याद किया।

मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर स्मरण कर रहा हूं। वह ऐसे अग्रणी नेता थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को दृढ़ विश्वास के साथ प्रज्वलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।’’

राष्ट्रवादी आंदोलन को लोकप्रिय बनाने के तिलक के प्रयासों ने उन्हें लोकमान्य की उपाधि दिलाई। उनका नारा ‘‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’’ लोगों के दिलों में उतर गया।

मोदी ने लोकमान्य तिलक को याद करते हुए कहा, ‘‘वह एक उत्कृष्ट विचारक भी थे जो ज्ञान की शक्ति और दूसरों की सेवा में विश्वास करते थे।’’

मोदी ने क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी आजाद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह अद्वितीय वीरता और साहस के प्रतीक थे।

उन्होंने कहा, ‘‘स्वतंत्रता के भारत के प्रयासों में उनकी भूमिका का बहुत सम्मान किया जाता है और यह भूमिका हमारे युवाओं को साहस एवं दृढ़ विश्वास के साथ न्याय के पक्ष में खड़े होने के लिए प्रेरित करती है।’’

आजाद अंग्रेज शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी आंदोलन का हिस्सा थे और माना जाता है कि उन्होंने पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान अपनी पिस्तौल खुद पर तान ली थी तथा वह औपनिवेशिक शासकों द्वारा कभी न पकड़े जाने की अपनी प्रतिज्ञा पर अडिग रहे। जब उनकी मौत हुई, उस समय उनकी आयु मात्र 24 वर्ष थी।

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