मशहूर सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी पारले एग्रो (Parle Agro) पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा हंटर चला है। पेप्सिको (PepsiCo) के साथ चल रहे ‘Fizz’ ट्रेडमार्क विवाद में अदालत के निर्देशों की अनदेखी करना कंपनी को भारी पड़ गया। वहीं एक बेंच द्वारा न्यायिक आदेशों का उल्लंघन करने पर पारले एग्रो पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

जानें क्या है पूरा मामला?

बता दें कि यह कानूनी लड़ाई साल 2021 में शुरू हुई थी जब पेप्सिको ने पारले एग्रो के ‘B Fizz’ बेवरेज के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था। पेप्सिको का आरोप था कि पारले एग्रो अपने लेबल पर ‘For The Bold’ टैगलाइन का इस्तेमाल कर रही है जो पेप्सिको के अधिकारों का उल्लंघन है।जानकारी के मुताबिक सितंबर 2023 में कोर्ट ने पारले एग्रो को इस टैगलाइन के इस्तेमाल की अनुमति तो दी थी लेकिन कुछ सख्त शर्तें रखी थीं वो ये हैं कि विज्ञापनों में टैगलाइन को प्रमुखता से नहीं दिखाया जाएगा। फेसबुक से कुछ पुराने विज्ञापन हटाने होंगे। हर दो महीने में कंपनी को ‘B Fizz’ की बिक्री (Sales) के प्रमाणित आंकड़े कोर्ट में पेश करने होंगे। वहीं पेप्सिको ने हाल ही में कोर्ट को बताया कि पारले एग्रो ने पिछले ढाई साल से बिक्री का ब्योरा (Sales Returns) दाखिल नहीं किया है।

कोर्ट की फटकार: न्यायिक आदेशों की पवित्रता सर्वोपरि

सुनवाई के दौरान पारले एग्रो ने दलील दी कि इन आंकड़ों की जरूरत केवल ट्रायल के समय होगी। वहीं इस तर्क पर नाराजगी जताते हुए जस्टिस गेडेला ने कहा कि कोई भी पक्ष अपनी मर्जी से यह तय नहीं कर सकता कि उसे कोर्ट का कौन सा आदेश मानना है और कौन सा नहीं। अदालत ने इस बात पर भी कड़ा रुख अपनाया कि कंपनी ने अपने हलफनामे में न तो कोई सफाई दी और न ही माफी मांगी।

वहीं अदालत ने पारले एग्रो को निर्देश दिया है कि वह तीन हफ्ते के भीतर ₹10 लाख का जुर्माना ‘भारत के वीर’ फंड में जमा करे। हालांकि फेसबुक पर पुराने पोस्ट मौजूद रहने के मामले में कोर्ट ने कंपनी को राहत दी है लेकिन कोर्ट ने माना कि भारी मात्रा में कंटेंट होने के कारण वे पोस्ट गलती से ऑनलाइन रह गए थे इसलिए इस पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

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