CISCE ने जारी किया 10वीं-12वीं क्लास का रिजल्ट, स्टूडेंट्स आसान स्टेप्स में ऐसे करें रिजल्ट चेक

काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) ने ICSE (कक्षा 10) और ISC (कक्षा 12) के परिणाम 2026 जारी कर दिए हैं। लंबे इंतजार के बाद छात्रों का रिजल्ट…

रेलवे लाइनों पर ड्रोन के जरिए रखी जाएगी नजर, लगेंगे CCTV कैमरे: रवनीत बिट्टू

रेलवे लाइनों पर ड्रोन से नजर रखी जाएगी। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने शंभू के निकट हाल ही में हुए विस्फोट स्थल का बीते दिन दौरा…

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चैंपियंस लीग सेमीफाइनल: एटलेटिको मैड्रिड और आर्सेनल के बीच पहला मुकाबला 1-1 से ड्रॉ

मैड्रिड, 30 अप्रैल । यूईएफए चैंपियंस लीग 2026 के सेमीफाइनल के पहले चरण में एटलेटिको मैड्रिड और आर्सेनल के बीच मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ। यह मैच जहां…

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(संशोधित) नेपाल : सरकार ने राजनीतिक नियुक्ति पाने वाले 2200 लोगों को एक साथ हटाने के लिए अध्यादेश राष्ट्रपति के पास भेजा

नोट- शीर्षक में संशोधन किया गया है। 30HINT7 क्रमांक से जारी समाचार के स्थान पर इसे लें। -सं. काठमांडू, 30 अप्रैल । नेपाल सरकार ने राजनीतिक नियुक्ति पाने वाले 2200…

45 की उम्र में सम्भावना सेठ ने दी Good News, सरोगेसी के जरिए जल्द घर में गूंजेगी किलकारी

सुरभि ज्योति के बाद अब टीवी इंडस्ट्री की फेमस अभिनेत्री Sambhavna Seth ने सोशल मीडिया पर पोस्ट पर अपने फैंस को बहुत बड़ी खुशखबरी दी है। उन्होंने पोस्ट के जरिये बताया…

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यूपी विधान सत्र शुरू होने से पहले महिला आरक्षण पर सत्ता पक्ष और विपक्ष का प्रदर्शन

यूपी विधानसभा में गुरुवार को सत्र शुरू होने से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक प्रदर्शन करते नजर आये। भाजपा की महिला विधयकों के नेतृत्व में विधायक, मंत्री विधानसभा…

उमस भरी गर्मी के बीच राहत की खबर, IMD ने जताई बारिश की संभावना

राष्ट्रीय राजधानी के सफदरजंग में बृहस्पतिवार को न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिन में कुछ स्थानों पर गरज के साथ…

यह चुनाव केवल इस बात तक सीमित नहीं रह गया है कि राज्य सचिवालय नबान्न तक कौन पहुंचेगा, बल्कि यह इस बात पर जनमत संग्रह बन गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 15 वर्षों के शासन के बाद भी बंगाल की केंद्रीय राजनीतिक शक्ति बनी रहती हैं या नहीं, और क्या लगातार चौथी जीत उन्हें 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी चेहरा स्थापित कर सकती है, या फिर भाजपा को राज्य में सत्ता का रास्ता मिल गया। दो चरणों में हुए विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 92.47 प्रतिशत दर्ज किया गया। पहले चरण में 93.13 प्रतिशत और दूसरे में 91.66 प्रतिशत मतदान हुआ। यह स्वतंत्रता के बाद का अब तक का सर्वाधिक मतदान है। इसने 2011 के 84 प्रतिशत मतदान के रिकॉर्ड को भी पार कर लिया, जब बनर्जी पहली बार सत्ता में आई थीं और 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन का अंत हुआ था। बनर्जी के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन की निर्णायक लड़ाई माना जा रहा है। लगातार तीन कार्यकाल और डेढ़ दशक तक सत्ता में रहने के बाद वह न केवल सत्ता बरकरार रखने बल्कि अपने स्थापित राजनीतिक ढांचे की रक्षा के लिए भी संघर्ष कर रही हैं। तृणमूल कांग्रेस और बनर्जी के बीच अंतर लगभग समाप्त हो चुका है। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने आक्रामक अभियान चलाया था, तब बनर्जी ने चोटिल होने के बावजूद व्हीलचेयर पर रहकर मुकाबला किया और जीतीं, जिससे उनका कद राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत विपक्षी नेता के रूप में बढ़ा। 2026 की लड़ाई अधिक कठिन मानी जा रही है। इस बार उन्हें सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के आरोप, भर्ती घोटालों और शासन संबंधी सवालों का सामना करना पड़ रहा है। तृणमूल के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, “यह चुनाव बंगाल की राजनीतिक पहचान की रक्षा को लेकर है। यदि दीदी फिर जीतती हैं, तो यह साबित होगा कि कल्याणकारी राजनीति और बंगाली अस्मिता सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को हरा सकती है।” दूसरी ओर, भाजपा के लिए बंगाल अब भी अधूरा राजनीतिक लक्ष्य बना हुआ है। पार्टी का मानना है कि वह राज्य में सत्ता हासिल कर अपने “अंतिम वैचारिक मोर्चे” को पार कर सकती है। पार्टी का वोट शेयर 2011 में लगभग चार प्रतिशत से बढ़कर 2019 में करीब 40 प्रतिशत तक पहुंचा और 2021 में उसने 77 सीटें जीतीं, जिससे वह तृणमूल की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गई। एक भाजपा नेता ने कहा, “हमारे लिए बंगाल अधूरा राजनीतिक मिशन है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर आज तक यह एक राजनीतिक यात्रा को पूरा करने का प्रश्न है।” चुनाव में सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर रहा। राज्यभर में लगभग 91 लाख नाम हटाए जाने से करीब 12 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हो गए। तृणमूल ने इसे अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, महिलाओं और गरीबों के मताधिकार को प्रभावित करने वाला कदम बताया, जबकि भाजपा ने इसे फर्जी नामों को हटाने की प्रक्रिया बताया। विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर ने चुनाव के गणित के साथ-साथ मनोविज्ञान को भी प्रभावित किया है। राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा कि चुनाव केवल संख्याओं से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न मनोवैज्ञानिक प्रभाव से तय होते हैं। मतगणना चार मई को होगी, जब यह स्पष्ट हो जाएगा कि बनर्जी का लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक वर्चस्व बरकरार रहता है या भाजपा अंततः राज्य में सत्ता तक पहुंचने में सफल होती है।

कानपुर के महाराजपुर इलाके में मंगलवार को एक सनसनीखेज घटना में एक तलाकशुदा महिला और उसकी दो नाबालिग बेटियों ने कथित तौर पर जहर खाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस ने…

पश्चिम बंगाल में मतदान के बाद अब नतीजों का इंतजार, ममता बनर्जी की कड़ी परीक्षा, भाजपा को सफलता की उम्मीद

15 मार्च को चुनाव आयोग द्वारा बिगुल फूंके जाने के ठीक 46 दिन बाद, पश्चिम बंगाल के हालिया इतिहास का सबसे तीखा और हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबला बुधवार को समाप्त हो…

बेंगलुरु में भारी बारिश का कहर! 24 घंटे में 8 की मौत, सड़कें बनीं नदियां, जारी हुई अलर्ट

बेंगलुरु में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने शहर में भारी तबाही मचाई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण…

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