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काठमांडू, 15 जुलाई । नेपाल के सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) के मुख्य सचेतक प्रकाशचन्द्र परियार ने संसद में अपनी ही पार्टी के सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया है। मीडिया संस्थानों के प्रवेश द्वार पर वाहन खड़ा कर आवाजाही बाधित किए जाने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने सरकार की जमकर आलोचना की।

प्रतिनिधि सभा की बैठक में परियार ने कहा कि केवल सत्ता में होने या किसी के स्वार्थ टकराने के कारण प्रेस पर किसी भी प्रकार का दबाव, भय या अराजकता स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए स्वतंत्र प्रेस की सुरक्षा करना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी है जिसमें सरकार खासकर गृहमंत्री असफल हुए हैं। उन्होंने कहा, “हम सत्ता में हैं, इसका मतलब यह नहीं कि प्रेस पर किसी भी तरह का दबाव बनाया जाए। यदि हम स्वतंत्र प्रेस की रक्षा के लिए आगे नहीं आएंगे, तो फिर कौन आएगा?”

परियार ने कहा कि नेपाली प्रेस बंदूक की धमकियों से नहीं डरा, इसलिए कुछ वाहनों को खड़ा कर उसे डराया नहीं जा सकता। उन्होंने दोहराया कि आरएसपी पूर्ण प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा के पक्ष में दृढ़ता से खड़ी है।

उन्होंने कहा, “राजधानी में प्रमुख मीडिया संस्थानों के मुख्य प्रवेश द्वार पर वाहन खड़े कर उनकी आवाजाही रोकने और मीडिया संस्थानों को डराने का घृणित प्रयास किया गया। मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ। ऐसा कृत्य केवल वही लोग करते हैं जो सत्य से डरते हैं। लेकिन सत्य को छिपाने की कोशिश करना हथेली से सूरज ढकने जैसा है।”

परियार ने कहा कि नेपाली पत्रकारिता ने अनेक कठिन दौर और बड़े संघर्षों का सामना करते हुए आज की ऊंचाई हासिल की है। उन्होंने स्मरण कराया कि तत्कालीन राजा ज्ञानेन्द्र शाह के प्रत्यक्ष शासन के दौरान सशस्त्र सैनिक समाचार कक्षों में घुसकर खबरों पर सेंसर लगाते थे, लेकिन तब भी नेपाली मीडिया नहीं झुका।

उन्होंने कहा, “जब उस दौर में नेपाली मीडिया नहीं डरा, तो सरकार में बैठे लोग यह कैसे सोच सकते हैं कि आज सड़क पर दो-चार वाहन खड़े कर उसे डराया जा सकता है? संकट चाहे जैसा भी हो, निर्भीक होकर खड़े रहने का नेपाली मीडिया का इतिहास भुलाया नहीं जा सकता।”

उन्होंने गृह प्रशासन और सरकार से सभी मीडिया संस्थानों और पत्रकारों को निर्बाध रूप से काम करने की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए इस विषय पर गंभीर ध्यान देने का आग्रह किया।

By editor

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