अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा जून 2026 में अपना पहला स्पेस स्टेशन मिशन लॉन्च करने जा रही है जिसके लिए भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन का चयन हुआ है। यह भारत के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि अनिल मेनन इस महत्वपूर्ण मिशन पर रोस्कोस्मोस सोयुज MS-29 स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष में उड़ान भरेंगे। उनके साथ रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डबरोव और अन्ना किकिना भी इस मिशन का हिस्सा होंगे।

8 महीने अंतरिक्ष में रहेंगे अनिल मेनन

यह मिशन कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से लॉन्च होगा। अंतरिक्ष में जाने के बाद, अनिल मेनन और उनकी टीम पृथ्वी की कक्षा में पहले से स्थापित लैंब में लगभग 8 महीने बिताएगी। इस दौरान अनिल मेनन मिशन के फ्लाइट इंजीनियर की अहम भूमिका निभाएंगे।

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कौन हैं अनिल मेनन? जानें उनका भारत और यूक्रेन से कनेक्शन

अनिल मेनन एक बेहद प्रतिभाशाली और अनुभवी भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं। वे इमरजेंसी मेडिकल एक्सपर्ट होने के साथ-साथ अमेरिकन एयरफोर्स में लेफ्टिनेंट कर्नल भी हैं।

  • जन्म: अनिल का जन्म 15 अक्टूबर 1976 को मिनेसोटा के मिनियापोलिस में हुआ था।
  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके माता-पिता का संबंध भारत और यूक्रेन से है जो उनके विविध सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है। अनिल मेनन का परिवार खास तौर पर केरल के मालाबार क्षेत्र का निवासी रहा है।
  • व्यक्तिगत जीवन: उनका विवाह अन्ना मेनन से हुआ है जो खुद स्पेसएक्स में चीफ स्पेस एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं। इस जोड़े के दो बच्चे भी हैं।
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अनिल मेनन का दिल्ली और उच्च शिक्षा से गहरा संबंध

हालांकि अनिल मेनन का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका में हुआ लेकिन उनका दिल्ली से भी एक ख़ास कनेक्शन रहा है। उन्होंने नई दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एक साल का कोर्स किया था। यहाँ उन्होंने रोटरी एम्बेसडरियल फेलो के रूप में मेडिसिन और मलयालम पर अध्ययन किया जो भारतीय संस्कृति और चिकित्सा के प्रति उनकी रुचि को दर्शाता है।

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उनकी शैक्षिक यात्रा भी बेहद प्रभावशाली रही है:

  • 1999: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरोबायोलॉजी में ग्रेजुएशन।
  • 2003: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री।
  • 2006: स्टैनफोर्ड मेडिकल स्कूल से मेडिसिन में डॉक्टरेट की डिग्री।
  • रिसर्च: टेक्सास मेडिकल ब्रांच यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस मेडिसिन में मेडिकल किट पर उनकी थीसिस भी प्रकाशित हुई थी।

अनिल मेनन का यह चयन न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का परिणाम है, बल्कि यह भारत के लिए भी एक गर्व का क्षण है जो अंतरिक्ष अन्वेषण में भारतीय मूल के पेशेवरों के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।

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