नीरज प्रजापति
समय पर मदद बनी जीवन की डोर, पुलिस, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और कांवड़ ड्यूटी में जुटे कर्मियों की संवेदनशीलता ने रचा मानवता का सुनहरा अध्याय
मुजफ्फरनगर। श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा केवल आस्था और शिवभक्ति का ही नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता और मानवता का भी अनुपम पर्व बनकर सामने आ रही है। लाखों शिवभक्तों की भीड़ के बीच सोमवार को ऐसा भावुक क्षण आया जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर दिल्ली लौट रही सात माह की गर्भवती कांवड़िया नेहा को अचानक मुजफ्फरनगर पहुंचने पर प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
एक पल के लिए परिजन और आसपास मौजूद लोग घबरा गए, लेकिन अगले ही पल मुजफ्फरनगर पुलिस, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और कांवड़ यात्रा में ड्यूटी निभा रहे कर्मचारियों ने जिस तत्परता, समर्पण और मानवीय संवेदना का परिचय दिया, उसने एक संभावित संकट को खुशियों के सबसे बड़े उत्सव में बदल दिया।
सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन तथा सहायक पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के. मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। बिना एक पल गंवाए गर्भवती महिला को सुरक्षित जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने पूरी तैयारी और जिम्मेदारी के साथ उपचार शुरू किया। कुछ ही देर बाद अस्पताल परिसर में दो नवजात शिशुओं की पहली किलकारी गूंज उठी। नेहा ने दो स्वस्थ जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। मां और दोनों नवजात पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा चिकित्सकों की निगरानी में स्वस्थ हैं।

इस सुखद समाचार के मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा स्वयं जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने नवजात शिशुओं और उनकी मां का कुशलक्षेम जाना, परिवार को शुभकामनाएं दीं तथा उपहार भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। अस्पताल में मौजूद लोगों ने इस दृश्य को देखकर कहा कि वर्दी केवल कानून व्यवस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि कठिन समय में परिवार का सहारा भी बन सकती है।
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए मुजफ्फरनगर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, एंबुलेंस सेवाएं, सफाई कर्मी, विद्युत विभाग, नगर निकाय, अग्निशमन विभाग, परिवहन विभाग तथा विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात बिना थके अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। हर छोटी-बड़ी आवश्यकता पर तुरंत सहायता उपलब्ध कराना इस बार की कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरा है।

जनपद के अधिकारी लगातार कांवड़ मार्गों का निरीक्षण कर रहे हैं, चिकित्सा शिविरों को सक्रिय रखा गया है, एंबुलेंस हर समय तैयार हैं और पुलिस बल पूरी संवेदनशीलता के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा में तैनात है। यही कारण है कि मुजफ्फरनगर केवल कांवड़ मार्ग नहीं, बल्कि सेवा, सहयोग और मानवीय मूल्यों का सबसे बड़ा केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, मानवीय संवेदना और सेवा का भाव एक साथ खड़े हो जाते हैं, तब हर संकट खुशी में बदल जाता है। सावन की पवित्र बेला में जन्मे इन जुड़वा बच्चों की पहली सांसें उस धरती पर पड़ीं, जहां शिवभक्तों की सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म मानते हुए हजारों अधिकारी, पुलिसकर्मी, चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी और अन्य कर्मचारी चौबीसों घंटे समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।
