रामपुर तिराहा कांवड़ थाना प्रभारी एसआई सुभाष चंद ने की शिवभक्तों से भावुक अपील कहा कि यदि कहीं शंकर जी व हनुमान जी की बड़ी मूर्ति वाली कांवड़ दिखाई दे तो तुरंत दें सूचना, एक बेटी अपनी मां का इंतजार कर रही है।
नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर। सावन की पावन कांवड़ यात्रा में लाखों शिवभक्त आस्था की डोर से बंधकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन इसी भीड़ के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने हर किसी का दिल दहला दिया है। हरिद्वार से अपनी मां के साथ कांवड़ लेकर लौट रही करीब 16 वर्षीय किशोरी अपनी मां से बिछड़ गई है। मां-बेटी के इस बिछोह ने पुलिस प्रशासन के साथ-साथ शिवभक्तों को भी भावुक कर दिया है। रामपुर तिराहा कांवड़ थाना प्रभारी एसआई सुभाष चंद ने जानकारी देते हुए बताया कि कु. सुखमणि मेहता, पुत्री स्वर्गीय नीरज मेहता, उम्र लगभग 16 वर्ष, निवासी बी-14, डी ब्लॉक-12, साईं सोसायटी, तिलक नगर, नई दिल्ली, हरिद्वार से अपनी मां श्रीमती नीलम मेहता के साथ कांवड़ लेकर वापस लौट रही थी। इसी दौरान छपार क्षेत्र के आसपास अत्यधिक भीड़ होने के कारण वह अपनी मां से बिछड़ गई। पुलिस के अनुसार किशोरी बेहद परेशान और भावुक अवस्था में मिली। उसने बताया कि उसकी मां का मोबाइल फोन बंद आ रहा है, जिससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। मासूम बेटी ने पुलिस को केवल इतना बताया कि उसकी मां शंकर जी और हनुमान जी की विशाल प्रतिमाओं से सुसज्जित कांवड़ के साथ यात्रा कर रही थीं। यही एक पहचान अब मां-बेटी को मिलाने की सबसे बड़ी उम्मीद बनी हुई है। थाना प्रभारी एसआई सुभाष चंद ने सभी कांवड़ सेवा शिविर संचालकों, स्वयंसेवकों, पुलिसकर्मियों और शिवभक्तों से मानवीय संवेदनाओं के साथ सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यदि किसी भी स्थान पर शंकर जी एवं हनुमान जी की बड़ी मूर्तियों वाली कांवड़ रुकी हुई दिखाई दे या उसके संबंध में कोई भी जानकारी मिले तो तत्काल मोबाइल नंबर 94543 91444 पर सूचना दें, ताकि एक बिछड़ी हुई बेटी को उसकी मां से सुरक्षित मिलाया जा सके। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल आस्था का नहीं बल्कि मानवता और सेवा का भी पर्व है। यदि सभी श्रद्धालु थोड़ी-सी सजगता और संवेदनशीलता दिखाएं तो यह बेटी जल्द ही अपनी मां की गोद में लौट सकती है। पुलिस की टीमें लगातार विभिन्न कांवड़ मार्गों, शिविरों और विश्राम स्थलों पर जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं। पुलिस प्रशासन ने सभी शिवभक्तों से अपील की है कि इस सूचना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। आपकी एक छोटी-सी सूचना किसी मां की तड़प खत्म कर सकती है और एक बेटी की आंखों में फिर से खुशी लौटा सकती है। सावन की इस पवित्र यात्रा में मानवता का सबसे बड़ा धर्म यही होगा कि इस बिछड़े परिवार को फिर से मिलाने में हर व्यक्ति अपना सहयोग दे।
