नीरज प्रजापति

मोज ऐप से जुड़ी समस्या सुलझाने के लिए गूगल पर खोजा नंबर, मदद के नाम पर मोबाइल में डाउनलोड कराया ऐप, दो बार में उड़ाई रकम, नई मंडी कोतवाली में मुकदमा दर्ज।

मुजफ्फरनगर। ऑनलाइन समस्या का समाधान तलाशना एक युवक को इतना महंगा पड़ा कि मामूली रकम कटने की चिंता देखते ही देखते 99 हजार रुपये की चपत में बदल गई। मोज ऐप से जुड़े लेनदेन की जानकारी लेने के लिए गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजना सुभाष नगर निवासी जावेद अली के लिए मुसीबत बन गया। कथित कस्टमर केयर प्रतिनिधि ने मदद का भरोसा देकर ऐसा जाल बिछाया कि युवक का मोबाइल ठगों के निशाने पर आ गया और उसके बैंक खाते से यूपीआई के जरिए हजारों रुपये निकाल लिए गए। मामले में नई मंडी कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

699 रुपये कटे तो गूगल पर तलाशने लगे मदद

मामला नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के सुभाष नगर का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जावेद अली ने 3 अगस्त 2026 को अपने मोबाइल में मोज ऐप डाउनलोड किया था। इस दौरान उनके बैंक खाते से 699 रुपये कट गए। खाते से रकम कटने पर उन्होंने इसकी वजह जानने और समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया। इसी सिलसिले में उन्होंने गूगल पर मोज ऐप के कस्टमर केयर का नंबर तलाशा और वहां मिले एक नंबर पर संपर्क कर लिया।

मदद का भरोसा देकर मोबाइल तक पहुंच बनाए बैठे ठग

फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को मोज ऐप के कस्टमर केयर से जुड़ा बताया। आरोप है कि उसने समस्या दूर करने के नाम पर जावेद अली को एक अन्य ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। युवक ने उसकी बातों पर भरोसा कर ऐप डाउनलोड कर लिया। इसके बाद उनका मोबाइल फोन हैक होने की बात सामने आई। ठगों ने यूपीआई के माध्यम से बैंक खाते में जमा रकम निकालनी शुरू कर दी। पीड़ित के मुताबिक, पहली बार में खाते से 90 हजार रुपये निकाले गए, जबकि दूसरी बार में नौ हजार रुपये और निकाल लिए गए। इस तरह दो लेनदेन में कुल 99 हजार रुपये की चपत लग गई। खाते से इतनी बड़ी रकम निकलने की जानकारी मिलते ही युवक के होश उड़ गए।

बैंक खाता बंद कराया, साइबर हेल्पलाइन पर भी दी सूचना

ठगी का पता चलने पर जावेद अली ने बैंक से संपर्क कर खाता बंद कराया और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 16 अक्टूबर को पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर नई मंडी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

एक क्लिक की लापरवाही पड़ सकती है भारी

यह घटना ऑनलाइन सहायता लेते समय सतर्क रहने की जरूरत को उजागर करती है। कस्टमर केयर नंबर हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही सत्यापित करना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड न करें और न ही उसे स्क्रीन या फोन का रिमोट एक्सेस दें। ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।

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