नीरज प्रजापति

भागवन्ती सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में दुर्गाष्टमी, महानवमी एवं विजयदशमी की पूर्ववेला पर भव्य सांस्कृतिक आयोजन।

मुजफ्फरनगर। नई मंडी स्थित भागवन्ती सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में दुर्गाष्टमी, महानवमी एवं विजयदशमी पर्व की पूर्ववेला पर श्रद्धा, भक्ति, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत भव्य कार्यक्रम का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा प्रस्तुत माँ दुर्गा के मनोहारी भजन, भावपूर्ण गीत, आकर्षक नृत्य एवं भक्तिमय आरती ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और भारतीय संस्कृति के दिव्य रंगों से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता आचार्या श्रीमती अर्चना शर्मा जी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में तीनों पर्वों के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय पर्व केवल परंपराओं के निर्वहन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे मानव जीवन में सकारात्मकता, आत्मानुशासन, साहस, संयम और सदाचार का संचार करने वाले प्रेरणास्रोत हैं। माँ दुर्गा की आराधना नारीशक्ति, आत्मबल एवं अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देती है, वहीं महानवमी साधना, संकल्प और शक्ति के जागरण का संदेश देती है। विजयदशमी अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य तथा बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत प्रतीक है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस एवं विजयदशमी के विशेष महत्त्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1925 में विजयदशमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। संघ का उद्देश्य समाज में संगठन, अनुशासन, सेवा, संस्कार एवं राष्ट्रनिष्ठा की भावना को सुदृढ़ करना तथा ऐसे चरित्रवान व्यक्तित्वों का निर्माण करना है, जो समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें।
अर्चना शर्मा जी ने कहा कि पर्वों को मनाने की सार्थकता तभी है, जब उनके आदर्श हमारे आचरण और जीवनशैली का अभिन्न अंग बनें। सुदृढ़ चरित्र, गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, माता-पिता के प्रति सम्मान तथा विद्यालय, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण ही संस्कारित जीवन की वास्तविक पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति के गौरवशाली मूल्यों को आत्मसात करते हुए अपने व्यक्तित्व को ज्ञान, विनम्रता, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण बनाएँ। छात्राओं ने माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान करते हुए सुंदर भजन, गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किए। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। वंदना विभाग प्रमुख श्रीमती पारुल माहेश्वरी जी ने सुमधुर संगत के माध्यम से कार्यक्रम को भक्तिमय गरिमा प्रदान की। आईटी प्रमुख श्रीमती शिल्पा मित्तल जी एवं श्रीमान रमन जी का कार्यक्रम के सफल संचालन एवं व्यवस्थाओं में विशेष सहयोग रहा, जिससे आयोजन की भव्यता और आकर्षण में अभिवृद्धि हुई।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. वन्दना शर्मा जी ने सभी को दुर्गाष्टमी, महानवमी एवं विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए मंगलकामनाएँ प्रेषित कीं। अपने संबोधन में उन्होंने नारीशक्ति के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए नारी के धैर्य, करुणा, ममता, त्याग, साहस एवं सृजनशीलता जैसे गुणों की विशेषता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि संस्कारों की संवाहिका और समाज के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की प्रमुख शक्ति भी है।
अंत में माँ दुर्गा की सामूहिक आरती, श्रीराम स्तुति एवं राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का गरिमामय समापन हुआ। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त परिवार उपस्थित रहा। संपूर्ण आयोजन ने विद्यार्थियों में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रगाढ़ करने का प्रेरक संदेश दिया।
यह आयोजन इस संकल्प के साथ संपन्न हुआ कि भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराएँ केवल उत्सवों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी के विचार, व्यवहार और चरित्र में प्रतिबिंबित होकर एक सशक्त, संस्कारित एवं राष्ट्रनिष्ठ समाज के निर्माण का आधार बनें।

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