नई दिल्ली। भारतीय रुपये की कमजोरी लगातार बढ़ती जा रही है। आज 3 दिसंबर को बाजार खुलते ही रुपया 90.17 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछला बंद भाव 89.96 रुपये था। साल 2025 की शुरुआत से अब तक रुपया 5.16% कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी को डॉलर के मुकाबले इसका भाव 85.70 रुपये था, जो अब सीधे 90 रुपये से ऊपर निकल चुका है।रुपये की इस गिरावट का सीधा असर आयात पर पड़ेगा। कच्चा तेल, विदेशी मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोना अब और महंगे होंगे। विदेश में पढ़ाई, इलाज या घूमने जाने वालों के लिए भी खर्च बढ़ जाएगा। पहले जब डॉलर 50 रुपये का था, तब 1 डॉलर के लिए 50 रुपये देने पड़ते थे, लेकिन अब वही डॉलर 90.17 रुपये में मिलेगा, जिससे फीस से लेकर रहने-खाने तक हर खर्च पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।रुपये में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाना है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस फैसले से भारत की GDP ग्रोथ 60–80 बेसिस पॉइंट तक नीचे जा सकती है और फिस्कल डेफिसिट बढ़ेगा। निर्यात घटने से विदेशी मुद्रा की आमद कम हुई है, जिससे रुपये पर दबाव और तेज हुआ है। इसके साथ ही जुलाई 2025 से अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) 1.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली कर चुके हैं, जो डॉलर में बदलने से बाजार में डॉलर की मांग बढ़ी और रुपये का मूल्य नीचे खिसक गया। तेल कंपनियों, सोना आयातकों और अन्य बड़े आयातकों द्वारा हेजिंग के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर खरीदने से भी रुपये की गिरावट और तेज हुई है।आर्थिक जानकारों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते रुपये पर दबाव फिलहाल कम होने की संभावना कम ही दिख रही है।

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