10 साल की सजा निलंबित, दोषसिद्धि पर रोक लगाने से अदालत का इनकार, अब्दुल्ला की रिहाई का रास्ता खुला, आजम खान के बाहर आने पर अन्य मुकदमों के कारण संशय।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक को चर्चित दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की जमानत याचिकाएं मंजूर करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी। हालांकि, अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। इस फैसले से पिता-पुत्र को इस मामले में राहत मिली है, लेकिन जेल से रिहाई की स्थिति दोनों के लिए एक जैसी नहीं है। दो पैन कार्ड मामले में निचली अदालत से दोषी ठहराए जाने के बाद आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दोनों ने अपनी सजा को निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी। अदालत ने उनकी याचिकाओं पर राहत देते हुए सजा निलंबित करने का आदेश दिया, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यानी इस आदेश को दोषमुक्ति नहीं माना जाएगा, मामले में दोषसिद्धि का फैसला फिलहाल बरकरार है। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब्दुल्ला आजम खान की इस मामले में जेल से बाहर आने की राह खुल गई है। वहीं, आजम खान की रिहाई पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि उनके खिलाफ अन्य मामले भी लंबित बताए जा रहे हैं। ऐसे में उनकी वास्तविक रिहाई अन्य मामलों की कानूनी स्थिति और संबंधित आदेशों पर निर्भर करेगी। यह मामला अब्दुल्ला आजम के नाम कथित तौर पर दो पैन कार्ड होने से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों कार्डों पर अलग-अलग जन्मतिथियां दर्ज थीं। आरोप था कि दस्तावेजों का इस्तेमाल चुनाव संबंधी प्रक्रिया में किया गया और आजम खान ने कथित तौर पर इसमें भूमिका निभाई। मामले में निचली अदालत ने पिता-पुत्र को दोषी ठहराकर सजा सुनाई थी, जिसे दोनों ने उच्च अदालत में चुनौती दी। हाईकोर्ट के इस फैसले को आजम खान और उनके बेटे के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है। हालांकि, जमानत और सजा निलंबन का आदेश अन्य मामलों में स्वतः राहत नहीं देता। आजम खान की रिहाई के लिए यह देखना जरूरी होगा कि उनके खिलाफ लंबित अन्य मामलों में कोई ऐसा आदेश तो नहीं है, जिसके कारण उन्हें जेल में रहना पड़े।
