नई दिल्ली, 25 जुलाई । दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में शनिवार को दिल्ली सरकार के मंत्री परवेश वर्मा की ओर से आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में आज साक्ष्य के रुप में इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज दाखिल किए गए। एडिशनशन चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने मामले की अगली सुनवाई एक अगस्त को करने का आदेश दिया।
आज शिकायतकर्ता परवेश वर्मा की ओर से कुछ दस्तावेज और पेन ड्राइव में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य दाखिल किया, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया। इसके पहले 15 जुलाई को परवेश वर्मा की ओर से दो गवाहों शक्ति सिंह सहरावत और कुलभूषण जैन के बयान दर्ज कराए गए थे।
शिकायतकर्ता परवेश वर्मा ने 4 जुलाई को अपना बयान दर्ज कराया था। परवेश वर्मा ने अपने बयान में कहा था कि सौरभ भारद्वाज ने उनके और उनके परिवार की छवि को खराब करने के लिए झूठे आरोप लगाए। उन्होंने कहा था कि सौरभ भारद्वाज ने झूठा आरोप लगाया था कि परवेश वर्मा ने बतौर मंत्री अपने पद का गलत इस्तेमाल कर अपने कथित सहयोगी को लगभग पांच सौ करोड़ रुपये के एक निजी स्कूल ट्रस्ट में ट्रस्टी नियुक्त किया।
परवेश वर्मा ने आपराधिक मानहानि याचिका में कहा है कि सौरभ भारद्वाज ने 15 और 16 मई को उन्हें बदनाम करने की नीयत से सोशल मीडिया पोस्ट किया। याचिका में कहा गया है कि सौरभ भारद्वाज ने झूठा आरोप लगाया था कि परवेश वर्मा ने बतौर मंत्री अपने पद का गलत इस्तेमाल कर अपने कथित सहयोगी को लगभग पांच सौ करोड़ रुपये के एक निजी स्कूल ट्रस्ट में ट्रस्टी नियुक्त किया। याचिका में कहा गया है कि सौरभ भारद्वाज ने ये भी कहा था कि परवेश वर्मा ने स्कूल के कर्मचारियों के पक्ष में काम किया जो पॉक्सो केस में आरोपित हैं। परवेश वर्मा ने कहा है कि सौरभ भारद्वाज के ये पोस्ट समाज की नजरों में उनकी छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के लिए किए।
इसी मामले में परवेश वर्मा ने सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में दीवानी मानहानि का केस दायर किया है। उच्च न्यायालय में दाखिल दीवानी मानहानि याचिका में परवेश वर्मा ने सौरभ भारद्वाज से पांच करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।
