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नई दिल्ली, 08 अक्टूबर । परंपरा और आधुनिकता के अनूठे संगम के रूप में देशभर के व्यापारियों ने रविवार को दीपों का त्योहार दीपावली का पर्व अपने पारंपरिक बही-खातों के साथ-साथ आई-पैड, लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, चेकबुक तथा अपने दैनिक व्यापारिक कार्यों में उपयोग होने वाले अन्य डिजिटल उपकरणों की पूजा-अर्चना करके मनाया।

देश के व्यापारियों के शीर्ष संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के आह्वान पर चांदनी चौक सांसद एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के निवास पर विशेष दीपावली पूजन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें राजधानी नई दिल्ली के अनेक प्रमुख व्यापारी नेताओं एवं विभिन्न व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सुप्रसिद्ध आचार्य पंडित प्रमोद शास्त्री ने पारंपरिक मंत्रोच्चार एवं पूर्ण वैदिक विधि-विधान से दीपावली की पूजा को विधिवत संपन्न कराया। पूजा स्थल को फूलों एवं गुलाब की पंखुड़ियों से सजाया गया था। इसके साथ ही समृद्धि एवं दिव्य प्रकाश के प्रतीक स्वरूप सरसों के तेल से मिट्टी के दीपक प्रज्वलित किए गए। एक पारंपरिक भारतीय व्यापारी (लाला) को कंप्यूटर पकड़े हुए दर्शाने वाला बड़ा चित्र भारतीय व्यापार के बदलते स्वरूप का प्रतीक बना। भगवान श्री गणेश एवं मां महालक्ष्मी की प्रतिमाओं का दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया।

इस अवसर पर प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि दीपावली भारतीय संस्कृति, आस्था, परंपरा और आर्थिक समृद्धि का अद्भुत संगम भी है। उन्होंने बताया कि यह केवल सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व ही नहीं, बल्कि भारत का सबसे बड़ा आर्थिक महोत्सव भी है। सांसद ने कहा कि पारंपरिक बही-खातों के साथ आई-पैड, लैपटॉप, कंप्यूटर और मोबाइल फोन की पूजा इस बात का प्रतीक है कि भारतीय व्यापारी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक तकनीक को भी पूरी उत्साहपूर्वक अपना रहे हैं। यही नए भारत की भावना है, जहां परंपरा और तकनीक साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष दीपावली के व्यापारिक मौसम में भारतीय उत्पादों की जबरदस्त मांग देखने को मिली। खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई ) के संदर्भ में वैश्विक खुदरा कंपनियों के बढ़ते प्रभाव से पारंपरिक भारतीय व्यापार की रक्षा के संकल्प के प्रतीक स्वरूप व्यापारियों ने संकटमोचन के रूप में विख्यात भगवान श्री हनुमान जी की भी पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से इस परंपरा का अयोजन किया जा रहा है।

खंडेलवाल ने कहा कि वोकल फॉर लोकल अब केवल एक नारा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय आर्थिक आंदोलन का स्वरूप ले रहा है। भारतीय निर्मित प्रत्येक उत्पाद की खरीद देश के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करती है, रोजगार के अवसर पैदा करती है और हमारे कारीगरों एवं उद्यमियों को प्रोत्साहित करती है। भारतीय उत्पादों को चुनकर देश के नागरिक वास्तव में भारत के आर्थिक भविष्य में निवेश कर रहे हैं।

By editor

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