उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेश में संचालित मेट्रो परियोजनाओं की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश को आधुनिक, सुगम और विश्वस्तरीय शहरी परिवहन व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और संबंधित विभागों के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित करने के निर्देश भी दिए। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मेट्रो केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि शहरों की अर्थव्यवस्था को गति देने और निवेश आकर्षित करने का मजबूत माध्यम है।

‘मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाए’ 
उन्होंने मेट्रो परियोजनाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि मेट्रो के साथ मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाए और अंतिम दूरी तक के संपर्क को प्राथमिकता दी जाए, ताकि यात्रियों को घर से गंतव्य तक निर्बाध यात्रा की सुविधा मिल सके। इसके लिए मेट्रो स्टेशन को सिटी बस, ई-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित सेवाओं से जोड़ा जाए। बैठक में लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

‘शेष कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने की योजना’
बताया गया कि लखनऊ मेट्रो का लगभग 23 किलोमीटर लंबा गलियारा पूर्ण रूप से संचालित है और इसके विस्तार के अंतर्गत चारबाग से वसंत कुंज (कॉरिडोर-1बी, लगभग 11.16 किमी) को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पुराने लखनऊ की घनी आबादी वाले क्षेत्रों को आधुनिक यातायात सुविधा मिलेगी। वहीं, कानपुर मेट्रो परियोजना के कुल 32.4 किलोमीटर लंबे दोनों गलियारों पर कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें लगभग 15 किलोमीटर के खंड पर परिचालन शुरू हो चुका है और शेष कार्य को मार्च 2027 तक पूरा करने की योजना है।

बैठक में बताया गया कि आगरा मेट्रो की लगभग 29.4 किलोमीटर लंबी परियोजना में प्राथमिक खंड (करीब 6.5 किमी) पर ट्रेन का परिचालन किया जा रहा है तथा कॉरिडोर-1 को जून 2026 तक और कॉरिडोर-2 को चरणबद्ध रूप से वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि मेट्रो सेवाओं का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और लखनऊ, कानपुर तथा आगरा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं जिससे सड़कों पर यातायात का दबाव कम हुआ है और समय की बचत हो रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाए तकनीकी गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, और कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे।

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