इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में दर्ज एक मामले के संबंध में भीम आर्मी के एक नेता की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को इस मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया। न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्रा की पीठ ने 13 मई को दिए अपने आदेश में भीम आर्मी के नेता सुधीर आर्यन को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) (घृणास्पद भाषण और डिजिटल गलत सूचना के माध्यम से उपद्रव) के तहत दर्ज प्राथमिकी के मामले में अंतरिम राहत प्रदान की।
पीलीभीत में दर्ज हुई थी FIR, पेट्रोल-डीजल वाले बयान पर की थी पोस्ट
पीलीभीत के थाना करेली में 8 अप्रैल को दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, भीम आर्मी एकता मिशन (बरेली मंडल) के मंडलीय उपाध्यक्ष सुधीर आर्यन पर सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री के बयान के संदर्भ में अपमानजनक पोस्ट करने का आरोप है। मुख्यमंत्री ने लोगों को जरूरत पड़ने पर ही डीजल और पेट्रोल खरीदने की सलाह दी थी जिसको लेकर आर्यन ने यह पोस्ट की थी।
अदालत में दलील: ‘मानसिक स्थिति बताना CM का चरित्र हनन नहीं’
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि यदि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को सही मान भी लिया जाए तो भी याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री के चरित्र का हनन नहीं किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी ने केवल एक ऐसे शब्द का उपयोग किया जो मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति की व्याख्या करता है और उन्होंने अभिव्यक्ति के अधिकार का ही प्रयोग किया है इसलिए बीएनएस की धारा 353(2) के तहत कोई अपराध नहीं बनता। वहीं, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि प्राथमिकी में एक संज्ञेय अपराध का स्पष्ट रूप से खुलासा होता है। इसलिए याचिकाकर्ता किसी तरह की राहत का पात्र नहीं है।
12 अगस्त को होगी अगली सुनवाई, तब तक गिरफ्तारी पर पूरी तरह रोक
बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए और याचिकाकर्ता के वकील द्वारा इस रिट याचिका के समर्थन में दी गई दलील पर भी विचार करते हुए इस अदालत के अगले आदेशों तक याचिकाकर्ता को इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 12 अगस्त तय की।
