BSF हेडक्वार्टर के बाहर हुए IED ब्लास्ट मामले की जांच के बीच पुलिस ने नवांशहर जिले के गांव से 3 युवकों को हिरासत में लिया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया, लेकिन गांव वालों का कहना है कि युवकों के कथित लिंक सामने आने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए साथ ले जाया गया है।

पूछताछ के लिए मोहाली ले गई पुलिस 
जानकारी के अनुसार पुलिस ने जिन युवकों को हिरासत में लिया है, उनमें एक युवक का करीब एक माह पहले ही विवाह हुआ था। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था और गांव के एक NRI की मदद से उसका घर बना था। वह सूंढ स्थित पेट्रोल पंप पर काम करता था, जहां से पुलिस ने उसे उठाया। दूसरा युवक परिवार का इकलौता बेटा बताया जा रहा है। गांव के लोगों के मुताबिक वह भी पेट्रोल पंप पर नौकरी करता था और बेहद साधारण परिवार से संबंध रखता है। तीसरे युवक लखविंदर को लेकर उसके परिवार ने बताया कि पुलिस ने फोन कर उसे पूछताछ के लिए पेश करने को कहा था, जिसे गांव वालों से सलाह लेकर पुलिस के हवाले किया गया। पता चला है कि पुलिस उसे मोहाली पूछताछ के लिए ले गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले में गहन जांच कर रही है और अभी तक किसी भी युवक की भूमिका को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इलाके में पुलिस की कार्रवाई के बाद लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

क्या है मामला 
बता दें कि मंगलवार देर शाम 8 बजे जालंधर बी.एस.एफ. के हैड क्वार्टर के बाहर एक्टिवा में ब्लास्ट हो गया था। पहले इसे नॉर्मल धमाका समझा जा रहा था लेकिन अगले ही दिन सी.पी. धनप्रीत कौर ने फॉरेंसिक टीम द्वारा जुटाए सबूतों के आधार पर पुख्ता किया कि यह आई.ई.डी. धमाका था। सी.सी.टी.वी. कैमरे चैक करने पर पता लगा कि कैंपस में पार्सल के लिए डिलीवरी ब्वॉय जब अपनी एक्टिवा के पास खड़ा था तो एक व्यक्ति एक्टिवा पर पैकेट रख कर बस स्टैंड की तरफ पैदल भागा और कुछ सैकेंड बाद धमाका हो गया। धमाका इतना जोरदार था कि एक से डेढ किलोमीटर तक आवाज सुनाई गई और एक्टिवा के परखच्चे उड़ गए। धमाके के कारण वहां से गुजर रही कई गाड़ियों के एयरबैग खुल गए थे। पुलिस ने काफी घंटों तक डिलीवरी ब्वॉय गुरप्रीत निवासी गढ़ा को पूछताछ के बाद क्लीन चिट दे दी थी। वह बीएसएफ के पूर्व जवान का बेटा था। थाना नई बारादरी में अज्ञात आरोपियों खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया था। घटना के अगले दिन डी.जी.पी. गौरव यादव के अलावा केंद्रीय फॉरेंसिक टीम, एन.आई.ए. समेत कई जांच एजैंसियां जांच में करने के लिए मौके पर आई थी।

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