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नई दिल्ली, 28 मई । केंद्र सरकार देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शिक्षा को आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को नई दिल्ली में एआई करिकुलम टास्क फोर्स के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

बैठक में इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रमों में व्यापक बदलाव पर चर्चा हुई। सरकार ने एआई शिक्षा में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग बढ़ाने, इंडस्ट्री के साथ जुड़ी पढ़ाई और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया है।

टास्कफोर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय संस्थानों में एआई से जुड़े विषय पढ़ाए जा रहे हैं लेकिन जेनरेटिव एआई और फाउंडेशन मॉडल जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अभी भी व्यावहारिक प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है।

नई व्यवस्था के तहत छात्रों को शुरुआत से ही इंडस्ट्री आधारित प्रोजेक्ट्स, कैपस्टोन प्रोजेक्ट और एआई सॉल्यूशन इंजीनियरिंग से जोड़ा जाएगा। साथ ही प्रैक्टिकल एक्सपोजर को मौजूदा 25–30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40–75 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव रखा गया है।

सरकार जिम्मेदार एआई और एआई गर्वनेंस को भी पूरे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की तैयारी में है। इसके अलावा छात्रों को एक साल बाद सर्टिफिकेट, दो साल बाद डिप्लोमा और तीन साल बाद एडवांस डिप्लोमा देने की व्यवस्था पर भी सहमति बनी है।

बैठक में शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी विशेष चर्चा हुई। इसके तहत ट्रेन- दी ट्रेनर कार्यक्रम, आधुनिक एआई लैब और उद्योग विशेषज्ञों को एडजंक्ट फैकल्टी के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया।

सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से साझा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि कॉलेजों को जीपीयू कम्प्यूट, सॉफ्टवेयर प्लेटफार्म और आधुनिक एआई टूल्स उपलब्ध कराए जा सकें।

सरकार जल्द ही एआईसीटीई के साथ मिलकर नए पाठ्यक्रम को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

By editor

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